जैतीपुर। पीएचसी गढि़या रंगीन में बिजली नहीं होने के कारण गर्भवती को भर्ती करने से इन्कार करने व गेट के पास फर्श पर प्रसव होने के मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सीएचसी की टीम ने सोमवार को पीएचसी जाकर स्टाफ के बयान दर्ज किए। वहीं, दूसरी ओर प्रसूता के पति ने एसपी को पत्र भेजकर संबंधित पर कार्रवाई की मांग की है।
28 मई की रात को पीएचसी पर आई भूपेंद्र की गर्भवती पत्नी बेबी को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। आरोप है कि स्टाफ नर्स ने बिजली नहीं होने की बात कहते हुए दरवाजा खोलने से मना कर दिया, जिस कारण गेट पर ही प्रसव हो गया। घटना संज्ञान में आने के बाद सीएचसी जैतीपुर के प्रभारी डॉ. शजर ने जांच टीम गठित की।
सोमवार को टीम ने अस्पताल पहुंचकर स्टाफ के बयान दर्ज किए। टीम के सदस्यों ने शिकायतकर्ता को भी बुलाया, लेकिन वह नहीं आए। ऐसे में उनके बयान नहीं हो सके। दूसरी ओर बेबी के पति भूपेंद्र ने एसपी को पत्र भेजकर बताया कि स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारियों ने अस्पताल का मुख्य गेट नहीं खोला। इसके चलते प्रसूता को चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। कई बार अनुरोध करने के बाद भी कोई सहायता नहीं की।
काफी देर के बाद कुछ डॉक्टर और कर्मचारी तौलिया व बनियान पहने हुए बाहर निकले। उन्होंने भी उपचार नहीं किया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी व संबंधित कर्मचारियों पर विधिक कार्रवाई की मांग की है। थाना प्रभारी हरिकेश सिंह ने बताया कि भूपेंद्र की तहरीर पर जांच की जा रही है। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।