भंडार में भरपूर होने का दावा
रबी की फसल की बोआई के लिए डीएपी की चाह में समितियों के चक्कर लगा रहे किसान परेशान हैं। उन्हें उपलब्धता न होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है। जबकि, प्रशासन खाद के पर्याप्त भंडारण का दावा कर रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि खाद जरूरतमंदों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही, इस गोलमाल के पीछे कौन हैं? प्रशासन के पास भी इसका कोई सटीक जवाब नहीं है। हर वर्ष गेहूं, आलू और सरसों की बोआई के समय खाद की किल्लत हो जाती है। इसके बाद भी प्रशासन खाद वितरण की सही से तैयारी नहीं करता है। जब कहीं से खाद नहीं मिलती है तो किसान ब्लैक में खाद लेने के लिए मजबूर होते हैं।
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देर होने पर बढ़ेगी खेती की लागत
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि धान कटने के बाद खेतों में नमी है। किसान ने पलेवा लगाकर खेत तैयार कर लिए हैं। अगर खाद नहीं मिली तो खेतों से नमी खत्म हो जाएगी। ऐसे में फिर सिंचाई करके खेत में पलेवा लगाना पड़ेगा। इससे खेती की लागत बढ़ेगी।
24 घंटे में आने वाली हैं दो रैक
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अगले 24 घंटे में जिले में दो प्राइवेट कंपनियों की रैक पहुंचने वाली हैं। दोनों रैक से करीब 1700 टन डीएपी और एनपीके आएगी। इसमें से 30 प्रतिशत सहकारी साधन समितियों को भेज दी जाएगी।