जलालाबाद स्थित मां रेणुका मंदिर प्रांगण मौजूद श्रद्धालु। संवाद
जलालबाद। भगवान परशुराम की जन्मस्थली गांव ढकियाइन के जमदग्नि आश्रम स्थित मां रेणुका मंदिर परिसर में शुक्रवार को मेला लगा। यह मेला हर साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया को लगता है। यहां श्रद्धालुओं ने देवी मां का पूजन किया। धार्मिक अनुष्ठान कराए और दुकानों पर खरीदारी की।
प्राचीन काल से ही यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के बीच आस्था का केंद्र रहा है। मान्यता है कि ऋषि जमदग्नि अपनी पत्नी रेणुका के साथ यहां आश्रम में रहकर गुरुकुल चलाते थे। बताते हैं कि इसी आश्रम में भगवान परशुराम ने जन्म लिया था। यहां जमदग्नि व रेणुका के काफी प्राचीन मंदिर बने हैं और उसके सामने कई एकड़ में झील है, जो जमदग्नि झील के नाम से जानी जाती है।
पहले यह मेला लगातार तीन दिन चलता था और लकड़ी के बने उत्पादों की बिक्री के लिए प्रसिद्ध था। मेले में काफी दूर-दूर से दुकानदार लकड़ी से बने उत्पाद बिक्री के लिए लाते थे। समय के साथ यह मेला सिमटकर एक दिन का ही रह गया है और अब यहां लकड़ी के उत्पाद भी नहीं आते। मेले का आयोजन मां रेणुका देवी जीर्णोद्धार समिति की ओर से कराया गया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी व्यवस्था में लगे रहे।