शाहजहांपुर। औद्योगिक उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए शनिवार को उद्योग विभाग की ओर से रेती रोड स्थित एक लॉन में आयोजित एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव में उद्यमियों ने औद्योगिक उत्पादन और उसी अनुपात में निर्यात बढ़ाने के लिए उद्योगों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के साथ अन्य कई सहूलियतें देने की मांग प्रमुखता से उठाई। मुख्य अतिथि प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने भी माना कि उद्योगों के लिए बिजली सस्ती होनी चाहिए।
उन्होंने उद्योगों के विकास और जनपद के औद्योगिक उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना देने लिए प्रदेश सरकार की ओर से अनुकूल माहौल देने का वायदा किया। इस मौके पर वित्त मंत्री ने जनपद के निर्यातकों समेत अन्य उद्यमियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वित्त मंत्री ने पूर्व वक्ताओं द्वारा उद्योगों की राह में आने वाली बाधाओं विशेषकर प्रदूषण और जल उपयोग नियंत्रण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) व संबंधित विभागों के अधिकारियों द्वारा बरती जा रही सख्ती जैसी समस्याओं का संदर्भ लेते हुए कहा कि एनजीटी एक स्वायत्तशासी संस्था है।
इसलिए उस पर कुछ नहीं सकते, लेकिन जो उद्योगों के वर्तमान हालातों में सुधार के लिए अन्य कई कानूनी तरीके हैं, जिन्हें सरकार अपना रही है। नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम और वन टाइम सेटेलमेंट स्कीम इसीलिए लागू की गई हैं, ताकि औद्योगिक समस्याएं उत्पादन और उत्पादों के निर्यात में बाधा नहीं खड़ी कर सकें। इसके लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन पुरानी व्यवस्था से जुड़ीं समस्याओं के समाधान मेे थोड़ा वक्त लगता है।
स्थानीय उद्यमियों को निर्यात के लिए प्रोत्साहित करते हुए वित्त मंत्री खन्ना ने कहा कि बीते वित्त वर्ष में लखनऊ से जरी जरदोजी, चिकेन, प्लास्टिक और अन्य चीजों से निर्मित उत्पादों का 847 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। उन्होंने लघु, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्योग से जुड़े लखनऊ के कई छोटे उद्यमियों के कौशल की सराहना करते हुए कहा कि वहां महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाई जा रही मोमबत्ती और अगरबत्ती अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, थाईलैंड, वियतनाम जैसे देशों तक जा रही है। बहुत कम लोगों को पता होगा कि तीन साल पहले तक अपने जनपद से दूध निर्मित मशहूर लौंज का ब्रिटेन तक निर्यात होता था। इसलिए उद्यमी अपने छोटे-छोटे उत्पादों की गुणवत्ता सुधारकर उन्हें निर्यात के लायक बनाएं।
इससे पूर्व, डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में खपत की बहुत संभावनाएं हैं। यहां के उद्योगों की अधिकांश समस्याओं का निराकरण हो चुका है, अर्थात उद्योगों के लिए रनवे तैयार हो चुका है और उद्यमी उस पर अपने उत्पादों का जहाज दौड़ाने को तत्पर हों।
जनपद की कृषि आधारित उद्योग इकाइयां निर्यात के नए मानक गढ़ने में सक्षम हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि कुछ समय पहले तक उद्योग क्षेत्र को गलत निगाह से देखा जाता था, लेकिन अब धारणा बदल रही है। एमएसएमई सेक्टर 11 करोड़ लोगों को रोजगार देने के साथ देश की जीडीपी में 30 फीसदी का योगदान कर रहा है, फिर भी उसे तमाम बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि कार लोन छह प्रतिशत से मिल जाता है, जबकि उद्योगों को ऋण पर 12 फीसदी तक ब्याज देना पड़ता है। इसी तरह भूगर्भ जल भंडार का 93 प्रतिशत खेतों में सिंचाई पर, तीन प्रतिशत उद्योगों पर और शेष पीने पर खर्च होता है, लेकिन उद्योगों पर पानी कम लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इसी तरह लॉकडाउन अवधि में कारखाने चालू रहने के बावजूद वायु प्रदूषण का स्तर बहुत कम हो जाने से यह भी स्पष्ट हुआ कि औद्योगिक इकाइयां प्रदूषण का कारण नहीं हैं। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने औद्योगिक समस्याओं के समाधान को एकल खिड़की व्यवस्था को बेहद हितकारी बताते हुए कहा कि जनपद से निर्यात को बेहतर बनाने के लिए बिजली, डीजल आदि अन्य कच्चे माल की लागत कम करनी होगी।
शुरुआत में वित्त मंत्री का उद्योग उपायुक्त दुर्गेश कुमार, आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत चैप्टर चेयरमैन शुभम खन्ना आदि उद्यमियों ने स्वागत किया। बाद में वित्त मंत्री ने प्रदर्शनी में स्टालों का निरीक्षण किया और उद्यमियों को सलाह दी कि निर्यात के लिए वह अपने अपने उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने और उनकी वाजिब कीमतें तय करने पर ध्यान दें।
उन्होंने निर्यात और उद्योग क्षेत्र में सराहनीय भूमिका निभाने के लिए जी सर्जीवियर के प्रतिनिधि विनम्र अग्रवाल, पुवायां स्थित सुखबीर एग्रो एनर्जी के संचालक सुखबीर सिंह, होटल संचालक सुरेश सिंघल, सिटी पार्क के डेवलपर किशन अग्रवाल आदि को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। आईआईए के जिला सचिव रोहित गोयल के संचालन में हुए कार्यक्रम में जिला ग्रामोद्योग अधिकारी गजेंद्र सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष हरी प्रकाश वर्मा, महानगर अध्यक्ष अरुण गुप्ता, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र पाल यादव व अजय प्रताप यादव, तमाम उद्यमी, व्यापारी आदि मौजूद रहे।