परौर। एक दशक पहले करीब 14 लाख रुपये की लागत से बना पंचायत भवन जनता के लिए सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है। पंचायत भवन में कर्मचारियों के नहीं बैठने से ग्रामीणों को सरकार की मंशा के अनुरूप एक छत के नीचे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
देखरेख में बरती जा रही उदासीनता के कारण पंचायत भवन परिसर में आवारा पशु घूमने से गंदगी पसरी है। नियमानुसार पंचायत सचिव को गांव से संबंधित सभी सरकारी कार्य पंचायत भवन में बैठकर करने चाहिए। रोजगार सेवक, आशा, एएनएम आदि ग्राम स्तरीय कर्मचारी भी नियत दिवस पर पंचायत भवन में मौजूद रहने चाहिए, लेकिन वहां कोई कर्मचारी नहीं जाता।
सरकारी बैठकें भी प्राथमिक स्कूल में होती हैं। ग्रामीणों को चिकित्सा, विकास, राजस्व, सहकारिता आदि विभागों की योजनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती। कई वर्ष से रंग-रोगन नहीं होने से पंचायत भवन की दीवारें जर्जर होने लगी हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पंचायत भवन की व्यवस्थाएं सुधारने की मांग की है। पंचायत सचिव आदर्श कुमार ने बताया कि पंचायत भवन की नियमित साफ सफाई शुरू करा दी गई है। बाकी व्यवस्थाओं के बारे में भी अधिकारियों को अवगत कराया गया है।