मंगलवार को तड़के आई तूफान जैसी आंधी शहर के बिजली नेटवर्क पर कहर बनकर टूटी। हवा के भयावह थपेड़ों ने पॉवर नेटवर्क को इस कदर झकझोर दिया कि कई जगह पोल गिर गए तो अनेक स्थानों पर पेड़ की डालें टूटकर गिरने से बिजली लाइनें धराशायी होने के साथ शार्ट सर्किट के शिकंजे में आ गईं। इससे शहर के कई इलाकों में पांच घंटे तक बिजली सप्लाई ठप रही।
सुबह चार बजे के बाद तेज हवा चलनी शुरू हुई और कुछ ही देर में थपेड़ों ने भयंकर आंधी का रूप ले लिया। नतीजे में ढीले तारों वाली बिजली की लाइनें आपस में टकराने के साथ पावर नेटवर्क क्षतिग्रस्त होने लगा। करीब आधा घंटे तक आंधी का कहर जारी रहा। इस दौरान हथौड़ा सब स्टेशन से निकली हयातपुरा फीडर की 11 केवी लाइन का पोल बरगद वाली मस्जिद के पास उखड़कर झुक गया।
उधर, बारादरी मोहल्ले में नीचे से गल चुका बिजली पोल तिरछा होकर गली में दूसरी साइड के मकानों की ओर झुक गया और तार काफी नीचे आ गए। इस बीच, कैंट एरिया में एमईएस वाली नर्सरी के पास पेड़ की डालें टूटकर गोविंदगंज-बहादुरगंज को जोड़ने वाली 33 केवी लाइन पर गिरीं तो हाईटेंशन तार टूटकर जमीन पर पसर गए। इसी क्षेत्र में खुले तारों वाली 11 केवी की कई लाइनें तेज थपेड़ों से आपस में उलझ गईं।
नतीजा यह हुआ कि लाइन फाल्ट बढ़ने से शहर के सभी सब स्टेशनों से बिजली सप्लाई ठप हो गई। पॉवर कारपोरेशन के एसडीओ सिटी इंद्रराज यादव के अनुसार 33 केवी और 11 केवी वाली लाइनें दिन में 11 बजे तक ठीक करके बिजली सप्लाई चालू कर दी गई, लेकिन गिरे पोल उठाने और उन्हें बदले जाने में काफी वक्त लग गया। इस कारण प्रभावित क्षेत्रों को अन्य लाइनों से जोड़कर फीडर वार दो-दो घंटे बिजली दी गई।
एक वर्ष में छठी बार
टूटा हथौड़ा का पोल
बहादुरगंज पॉवर सब स्टेशन के प्रभारी जेई और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर संगठन के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र पांडेय के अनुसार हथौड़ा सब स्टेशन के हयातपुरा फीडर की लाइन का पोल टूटने की एक साल में छह घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने इसके लिए एपीडीआरपी स्कीम के तहत बिजली लाइनों का रखरखाव करने वाली कार्यदायी संस्था एनकेजी की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि एनकेजी की टेकिभनकल टीम को कई बार हथौड़ा क्षेत्र के पुराने पोल बदलने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद कार्यदायी संस्था के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
क्रय केंद्रों पर घट
गई गेहूं की आवक
आंधी के साथ हुई बारिश से क्रय केंद्रों पर गेहूं की आवक भी घट गई है। उप संभागीय विपणन अधिकारी कौशल देव के अनुसार बेमौसम की बारिश से इस वर्ष गेहूं की 40 फीसदी फसल पहले ही कम हो चुकी है। मंगलवार को सुबह हुई बरसात से गेहूं भीगने के कारण किसानों ने उसे क्रय केंद्रों पर लाने से रोक लिया।
गन्ना पेड़ी को बारिश से होगा लाभ
अभी जलालाबाद और तिलहर क्षेत्र में करीब दस फीसदी गेहूं फसल कटनी बाकी रह गई है। दरअसल, उन्हीं क्षेत्रों में गेहूं की फसल नहीं कट पाई है, जहां अभी तक फसली नुकसान का सर्वे नहीं हुआ है। किसानों ने लेखपालों को फसल की बर्बादी दिखाने के लिए उसे काटने से रोक लिया, लेकिन बारिश ने उनके बचे-खुचे अरमानों पर पानी फेर दिया। जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय के अनुसार गन्ना फसल अभी बढ़वार नहीं ले पाई, इसलिए उसे आंधी से कोई नुकसान नहीं हुआ, उल्टे बारिश से गन्ना को लाभ होगा। सब्जियों की खेती के लिए भी बारिश लाभकारी होगी।