शाहजहांपुर। जिले में फसलों की सिंचाई के लिए शारदा नहर खंड और राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना के नियंत्रण में सदर व तिलहर तहसील में नहरों का जाल बिछा है, लेकिन कई नहरों की पटरियों पर आसपास के दबंगों ने झोपड़ियां डालकर कब्जा कर लिया है और नहर के किनारे स्थित विभागीय कृषि भूमि पर अनधिकृत तरीके से खेती की जा रही है। यह मसला सिंचाई बंधु की बैठकों में भी उठता रहा है पर अवैध कब्जे से नहरों को मुक्ति नहीं मिल पाई है।
जिले में करीब साढ़े चार लाख किसान हैं। इनमें से लगभग 2.5 लाख किसान कम जोत वाले लघु-सीमांत श्रेणी के हैं। इनमें से अधिकतर के पास सिंचाई के निजी संसाधनों का अभाव है। ये किसान रबी, खरीफ, जायद आदि सभी फसली सीजनों में सिंचाई के लिए मानसून की बारिश या फिर सरकारी नलकूपों और नहरों पर निर्भर हैं। कृषि उत्पादन में अग्रणी सदर और तिलहर तहसील में सिंचाई के लिए विभाग के नहर खंड और राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना के तहत 121 नहरों का जाल बिछा है।
इसके अतिरिक्त 452 राजकीय नलकूप विभिन्न तहसीलों में स्थापित हैं। चूंकि, जलालाबाद और पुवायां तहसील में नहरों की कमी है। इसलिए वहां अधिकतम कृषि रकबा सिंचन के दायरे में लाने के लिए नलकूपों की संख्या अधिक है। इन नलकूपों का कोई विकल्प नहीं होने से उन्हें ठीक रखा जाता है, लेकिन नहराें के कमांड एरिया वाली तहसीलों में करीब 30 प्रतिशत ऐसी माइनरें हैं, जिनकी वर्षों से उपेक्षा के चलते अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। सूखी पड़ी इन्हीं नहरों के इर्द-गिर्द खाली पड़ी जमीनों पर आसपास के गांवों में रहने वाले दबंगों की निगाहें लगी रहती हैं। विभाग के अधिकारी बंद पड़ी नहरों का दौरा करने की जहमत नहीं उठाते। इसीलिए ग्रामीणों को विभाग की जमीनों पर डेरा डालने का मौका मिल जाता है।