शाहजहांपुर। सर्दी में बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, जुकाम और बुखार को सामान्य बीमारी नहीं समझें। ये निमोनिया के लक्षण की शुरुआत भी हो सकती है। ये धीरे-धीरे निमोनिया में तब्दील होने के बाद जानलेवा भी हो सकती हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि निमोनिया की आशंका होने पर गंभीरता से उपचार कराएं।
12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। यह बीमारी सामान्य तौर पर पांच साल तक के बच्चों व 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को अधिक होती है। इसकी शुरुआत खांसी, बुखार से होती है। फिर सांस तेज चलने के साथ घरघराहट की आवाज आने लगती है।
गंभीर निमोनिया होने पर पसली धंसने के साथ ही सांस लेने पर नाक के नथुने फैलने लगते हैं। बच्चा दूध पीने के साथ खाना-पीना भी छोड़ देता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि निमोनिया हवा में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस के कारण होता है, जो सांस की नली के जरिये शरीर में पहुंचता है। धीरे-धीरे यह शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। उपचार में देरी होने पर जान भी जा सकती है।
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ये बरतें सावधानी
-सर्दी से बचाव करें। गर्म कपड़े पहनने के साथ ही सफाई का खास ख्याल रखें। निमोनिया पीड़ित के संपर्क में आएं तो हाथों को धोएं। खान-पान का विशेष ध्यान रखें।
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निमोनिया से बचाने के लिए टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए। टीकाकरण के कार्ड में भी बहुत-सी जानकारी होती है। समय पर उपचार कराने से निमोनिया से बचाव संभव है।
- डॉ.राजेश कुमार, प्राचार्य-राजकीय मेडिकल कॉलेज