पुवायां। छह माह तक मेहनत करने के बाद भी किसान का धान खरीद केंद्र पर नहीं बिका तो उसे घाटा होगा। लेकिन धान की एक एकड़ फसल पर बिचौलिया कुछ ही दिन में 11600 रुपये कमाएगा। एक तरफ खेत में मेहनत, फसल चोरी, आग लगने और बारिश, ओले आदि का खतरा और साहूकार से कर्ज का ब्याज। दूसरी तरफ नेतागिरी, दबंगई और गांठ में पैसा। कैसी भी चिंता नहीं और कमाई भी एकदम खरी।
आइए आपको बताते हैं कि किसान किस प्रकार हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी भूखा रहेगा और दलाल कैसे किसान के खून पसीने से तैयार की गई कमाई पर ऐश करेंगे। एक एकड़ खेत में इस वर्ष औसतन 22 क्विंटल धान निकल रहा है। धान कटने के बाद किसान को गेहूं की तैयारी करनी है। फसल के लिए लिया कर्ज आदि भी निपटाना है, और भी तमाम खर्चे हैं।
सेंटरों पर धान का रेट 1930 रुपये है, लेकिन वहां किसान को अपना धान बेचने के लिए तमाम पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी धान बिकने की कोई गारंटी नहीं है। मजबूरन किसान को फसल बिचौलियों को बेचनी पड़ रही है। बिचौलिए 13 से 14 सौ रुपये के भाव के धान खरीद रहे हैं। धान में करदा और नमी नहीं काटी जाती है, लेकिन रेट बेहद कम दिया जाता है। इस तहर किसान का एक एकड़ धान आढ़त पर बिकने से 30800 रुपये का होगा, जबकि धान पर प्रति एकड़ लागत 41100 रुपये आई है। ऐसे में आढ़त और राइस मिल पर धान बिका तो किसान को प्रति एकड़ 10300 रुपये का घाटा होगा।
अब बिचौलियों की बात करते हैं। कई राइस मिलों और आढ़तों पर धान खरीदते समय किसान के कागजात भी लिए जा रहे हैं और उनसे कहा जा रहा है कि धान बिक्री की राशि बैंक खाते में डाल दी जाएगी। इसमें अधिकांश धान सांठगांठ के चलते सेंटरों पर खरीदा दर्शा दिया जाता है। किसान से 14 सौ के भाव खरीदे गए 22 क्विंटल धान बिचौलिए को 30800 रुपये का पड़ेगा और यही धान किसान के आधार कार्ड आदि के बल पर सरकारी सेंटर पर पहुंच जाएगा। सरकारी रेट से एक एकड़ में पैदा हुआ धान 42460 रुपये का हो जाएगा। मतलब साफ है किसान को तो घाटा होगा, लेकिन बिचौलिया 11660 रुपये की कमाई कर लेगा।
राइस मिल बंद लेकिन धड़ल्ले से हो रही धान खरीद
खुटार। खुटार में एक राइस मिल को कागजों में बंद दर्शाया है। नियमों के तहत अब यहां खरीद नहीं की जा सकती है, लेकिन राइस मिल को एक व्यक्ति ने ठेके पर ले लिया है और यहां पर धड़ल्ले से धान खरीद की जा रही है। भाकियू का आरोप है कि धान को मिल के ड्रायर में सुखाकर पूरनपुर, गोला और जिले के कुछ सेंटरों पर भेजा जा रहा है। अधिकारी निरीक्षण करें तो मिल में भारी मात्रा में धान मिल जाएगा, लेकिन धान खरीदने और यहां से बाहर भेजे जाने के कोई कागजात यहां नहीं मिलेंगे।
एक एकड़ धान पर आती है लगभग इतनी लागत
खेत का ठेका एक एकड़ छमाही 15000-00
खेत की जुताई 3000-00
पौध 800-00
रोपाई 2500-00
खाद, खरपतवारनाशक 7500-00
सिंचाई (पंपिंग सेट) 9000-00
कटाई 1800-00
पूरी फसल में श्रमिक पर खर्च 1500-00
कुल लागत 41100-00
जगवंत सिंह, रूरा खुटार- फोटो : POWAYAN
सतनाम सिंह, भोपतपुर खुटार- फोटो : POWAYAN
रामाधार तिवारी, खुटार- फोटो : POWAYAN