शाहजहांपुर। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों पर आधारित रास लीला देखने के लिए शुक्रवार को दूसरे दिन भी मुमुक्षु आश्रम परिसर में भक्त उमड़ पड़े। आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद की देखरेख में हो रही रास लीला में रास आचार्य देवकी नंदन और उनकी टीम ने मीराबाई के चरित्र पर आधारित लीला का मंचन किया।
कलाकारों ने रास लीला का शुभारंभ मनमोहक मयूर नृत्य प्रस्तुत कर किया। लीला में दिखाया गया कि मीरा अपनी मां के साथ बाल्य अवस्था में संतों के पास जाया करती थीं। वहां उन्हें ठाकुर जी से प्यार हो गया। एक बार वह अपनी मां के साथ महात्मा के पास गईं और वहां से गिरधर गोपाल की मूर्ति को अपने साथ लाने की जिद करने लगीं।
महात्मा ने स्वप्न में कृष्ण के कहने पर उन्हें गिरधर गोपाल दे दिए। कालांतर में मेवाड़ के सिसोदिया राज परिवार में उनका विवाह हुआ, किंतु उनका श्रीकृष्ण से लगाव कम नहीं हुआ। पति के निधन के बाद देवर राणा विक्रम सिंह और ननद ऊदा बाई उन्हें परेशान करने लगीं। कलाकारों ने दिखाया कि देवर व ननद ने मीराबाई के पास फल की टोकरी में सांप भेज दिया, लेकिन उसमें भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हुए।
दोनों ने एक बार फिर षड्यंत्र करते हुए दूध में जहर मिलाकर दिया, लेकिन जहर गिरधर गोपाल पी गए और दूध मीराबाई ने पी लिया। कृष्ण से मिलने की तड़प में वह वृंदावन आ गईं। रासलीला में उन्हें लोक मान्यता के अनुरूप वृंदावन की गोपी दर्शाया गया। विदूषक के रूप में मनसुखा ने दर्शकों का मनोरंजन किया।
इससे पूर्व, स्वामी शुकदेवानंद महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आरके आजाद ने पूजन कर रासलीला का शुभारंभ किया। कृष्ण की भूमिका में भारत भूषण शर्मा, राधा की भूमिका में गोपाल शर्मा, मनसुखा की भूमिका में भूदेव शर्मा ने अपने भावपूर्ण अभिनय से सभी का मन मोह लिया। लीला के समापन पर आश्रम के अधिष्ठाता भगवान की आरती की। व्यवस्था में आश्रम के सचिव डाॅ. अवनीश मिश्रा, डाॅ. अनुराग अग्रवाल, सुयश सिन्हा, प्रकाश डबराल, डॉ. आलोक कुमार सिंह आदि का सहयोग रहा।