शाहजहांपुर रंग महोत्सव में बृहस्पतिवार को सात नाटकों का मंचन हुआ। बृहस्पतिवार को पहला नाटक बागी हठी नाट्य दर्पण कोलकाता की टीम ने मूर्तिमान के रूप में प्रस्तुत किया। बिना किसी संवाद का यह नाटक कलाकारों की भावभंगिमा और नायाब अभिनय से भरपूर तालियां बटोरने में कामयाब रहा। मूक अभिनय के सहारे कलाकारों ने एक पार्क की स्थिति का चित्रण कर तालियां बटोरीं। इसके बाद अदाकार ग्रुप सहारनपुर की टीम ने ताज महल का टेंडर, एकलव्य सांस्कृतिक समिति देहरादून ने महाभारत पर आधारित नाटक युद्धोपरांत, वेला थिएटर नई दिल्ली ने मशखरे, अर्पण सोसाइटी बीकानेर ने मौत रातभर क्यों नहीं आती, बग बाजार रंगमंच कोलकाता ने विक्रम ओ अदालत, दून घाटी रंगमंच देहरादून ने तुगलक नाटक का मंचन कर दर्शकों पर यादगार छाप छोड़ी।
नाटकों के माध्यम से कलाकार कभी भ्रष्टाचार की परते खोलने में कामयाब हुए तो कभी उन्होंने सभी को हंसाकर लोटपोट भी किया। इतिहास के आइने में भी दर्शकों को झांकने का भरपूर मौका मिला। कुल मिलाकर बृहस्पतिवार को दर्शक नृत्य और नाटकों में डूबे नजर आए।