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फसली नुकसान से प्रभावित तीन और किसानों की मौत

Sat, 25 Apr 2015 11:17 PM IST
शाहजहांपुर।
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जिले में फसली नुकसान से परेशान तीन और किसानों की पिछले 24 घंटे के दौरान मौत हो गई। कांट क्षेत्र के आजादपुर गांव में 60 वर्षीय मलिखान को गहाई कराने पर पर्याप्त गेहूं नहीं मिला तो उनकी हालत बिगड़ गई। घरवाले कुछ समझ पाते कि इससे पहले उनकी सांसें थम गईं।  अल्हागंज क्षेत्र के गांव मऊ रसूलपुर में फसली नुकसान से आहत 45 वर्षीय शेषपाल को शुक्रवार की शाम दिल का दौरा पड़ गया। घरवालों ने उन्हें फर्रुखाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन वहां उनकी सांसें थम गईं। उधर, तिलहर क्षेत्र के गांव खिरिया माल में 20 अप्रैल को फसली नुकसान के कारण फांसी लगाकर जान देने का प्रयास करने वाले 25 वर्षीय वीरेंद्र की उपचार के दौरान शनिवार को जिला अस्पताल में मौत हो गई। पुवायां क्षेत्र के गांव बैकुंठापुर निवासी 60 वर्षीय हरजिंदर सिंह की सांसें थम गईं। इन्हें मिलाकर जिले मेें अब तक 57 किसानों की मौत हो चुकी है।
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केस-एक
फसल की बर्बादी का नजारा सह नहीं पाए शेषपाल
अल्हागंज। गांव रसूलपुर निवासी दीना पुत्र उमराव वर्मा ने बताया कि उनके नाम तीन एकड़ जमीन है जिसमें गेहूं की फसल थी। पूरे रकबे में मात्र पांच क्विंटल गेहूं निकला। फसल की बर्बादी देखकर उनका पुत्र शेषपाल इतना दुखी हो गया कि उसे बृहस्पतिवार को दिल का दौरा पड़ गया। शेषपाल को फर्रुखाबाद के एक हार्ट स्पेशलिस्ट के यहां इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी। दीना काफी उम्रदराज हो गए जिसके चलते उनका बड़ा बेटा शेषपाल ही घर की देखभाल करता था। शेषपाल पर स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा का 2.31 लाख का फसली ऋण बकाया था और बाजार की उधारी भी चढ़ी थी।


केस-दो
खेत से घर लौटे और चल बसे मलिखान
कुर्रिया कलां। गांव आजादपुर निवासी मलिखान के पास 50 बीघा पैतृक जमीन है। करीब 20 बीघा जमीन बटाई पर लेकर गेहूं की बुवाई की। बीते दिन 30 बीघा फसल काटकर शनिवार को सुबह गहाई की तो सिर्फ 30 क्विंटल गेहूं देखकर परेशान हो उठे। खेत से घर लौटकर सीने में दर्द की शिकायत की, लेकिन अस्पताल ले जाए जाने से पहले उनकी मौत हो गई। घटना की पड़ताल करने लेखपाल के साथ गांव पहुंचे कानूनगो बलवीर सिंह को उनके बेटे सुधीर ने बताया कि उनके पिता की मौत हार्ट अटैक से हुई है। कानूनगो ने बताया कि घरवालों ने उनका पोस्टमार्टम कराए बगैर अंतिम संस्कार कर दिया।
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केस-तीन
फांसी लगाने के पांचवें दिन वीरेंद्र की थमीं सांसें
तिलहर। फसली नुकसान से परेशान होकर पांच दिन पहले फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास करने वाले क्षेत्र के गांव खिरिया माल निवासी वीरेंद्र की सांसें शनिवार को थम गईं। मृतक के भाई बड़े पिंकू के अनुसार पांच भाइयों में वीरेंद्र दूसरे नंबर के थे। छह बीघा जमीन में तीन क्विंटल गेहूं निकलने पर उन्होंने 20 अप्रैल को सुबह घर में पड़ी टीन से फांसी लगा ली। हालांकि, उस वक्त घरवालोें ने उन्हें फांसी लगाते देख बचा लिया और जिला अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों के अनुसार गले की नसों में खिंचाव से वीरेंद्र का स्नायु तंत्र खराब हो गया था। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।



केस-चार
बैकुंठापुर में किसान की मौत
मुरादपुर/खुटार। गांव बैकुंठापुर निवासी सतेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने इस बार आठ एकड़ गेहूं बोया था। बारिश और तेज हवाओं से गेहूं की सारी फसल गिरकर खराब हो गई और बाली काली पड़कर सूख गई। चार दिन पूर्व गेहूं की कटाई हुई तो आठ एकड़ में मात्र 40 क्विंटल गेहूं निकला। गेहूं घर आने पर पिता 60 वर्षीय हरजिंदर सिंह उर्फ राजेंद्र सिंह ने गेहूं कम देखा तो उदास हो गए। गेहूं कटने के दिन से ही पिता बेहद परेशान थे। परिवार के लोगों ने उन्हें काफी समझाया, लेकिन इसके बाद भी पिता की स्थित में सुधर नहीं हुआ। शुक्रवार रात उनकी तबियत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत के कुछ ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया। किसान की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है। शनिवार को दोपहर बाद हरजिंदर सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एसडीएम ने मामले की जानकारी से इंकार किया है।


अब तक 51 किसानों की मौत
प्रशासन ने की स्वीकार
फसली नुकसान से आहत होकर मरने वाले किसानों के प्रति शासन का सहानुभूति पूर्ण नजरिया देख प्रशासन ने भी सुर बदल दिया है। अधिकारियों ने माना कि नुकसान से प्रभावित 51 किसानों की मौत का ब्यौरा शासन को भेजा गया है। इस बीच, राहत वितरण अभियान भी जारी है। बताया गया कि अब तक 62094 किसानों को 22.72 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि केचेक दिए जा चुके हैं।
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