शाहजहांपुर। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश किरनपाल सिंह ने दहेज के लिए हत्या के एक मुकदमे में ससुर और पति को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सास और देवर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
सरकारी वकील आशीष त्रिपाठी और संतोष त्रिवेदी के अनुसार जलालाबाद क्षेत्र के मोहल्ला मनोरथ चौक की रहने वाली बिटाना देवी (वादिनी) ने अपनी बेटी सुनयना देवी की शादी मोहल्ला गांधी नगर निवासी अजीत के साथ की थी। वादिनी के मुताबिक शादी के कुछ समय बाद अजीत और उसके परिजन दहेज की मांग को लेकर पुत्री को परेशान करने लगे। ये लोग बाइक और नकद रुपये की मांग कर रहे थे। वारदात के एक हफ्ते पहले बेटी ने फोन पर वादिनी को बताया था कि ये लोग उसे जान से मार डालेंगे। सात नवंबर, 2016 को दोपहर उसे पता चला कि रामवीर, उसकी पत्नी बिट्टो देवी, बेटे अजीत और रंजीत ने उसकी बेटी की हत्या कर दी है। वादिनी की तहरीर पर सात नवंबर को थाना जलालाबाद में चारों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने दहेज हत्या में रिपोर्ट दर्ज कर ली। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान सरकारी वकीलों के तर्कों से सहमत होकर और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने रामवीर और अजीत को दहेज हत्या में दोषी माना। दोनों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा से दंडित किया गया है। वहीं सास बिट्टो देवी और देवर रंजीत को बरी कर दिया गया।