शाहजहांपुर/जैतीपुर। सिपाही बनने के बाद महज डेढ़ महीने पूर्व जैतीपुर थाने में पहली नियुक्ति पाने वाले कांस्टेबल विवेक कुमार के सिर पर अब बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है। माना जा रहा है कि परिवीक्षा काल में चल रहे कांस्टेबल को दो-तीन दिन में बर्खास्त किया जा सकता है। शुक्रवार को उसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं, निलंबित थाना प्रभारी अश्विनी कुमार के खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी।
बृहस्पतिवार को एंटी करप्शन की टीम ने सिपाही विवेक कुमार को थाना परिसर में 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। गढि़यारंगीन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद एंटी करप्शन टीम सिपाही को लेकर बरेली चली गई। थाना परिसर में भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद एसपी सौरभ दीक्षित ने कड़ा रुख अपनाते हुए जैतीपुर इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार को निलंबित कर दिया था। थाना प्रभारी प्रथमदृष्टया जांच में पर्यवेक्षण में लापरवाही के दोषी पाए गए हैं। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
जिले के सभी थानों में हाल में ही नौकरी ज्वाइन करने वाले सिपाहियों को भेजा गया है। ये सभी सिपाही अभी परिवीक्षा काल में चल रहे हैं। इनके कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी प्राथमिक तौर पर थाना प्रभारी की होती है। ऐसे में सिपाही विवेक कुमार के घूस लेते पकड़े जाने और थाना प्रभारी को उसकी भनक न लग पाने की बात किसी के गले नहीं उतर रही।
एंटी करप्शन टीम को सूचना देने वाले सुधांशु के मुताबिक, विवेक कुमार थाना प्रभारी के नाम पर ही रिश्वत मांग रहा था। यह बात भी समझ से परे है कि नया नवेला सिपाही मामले का जांच अधिकारी न होते हुए भी मामला निपटाने के लिए थाने के अंदर घूस लेने की हिम्मत कर रहा हो और इसकी जानकारी थाना प्रभारी को नहीं हो सकी।
विवादित रहने के बाद भी बने रहे कृपापात्र
अश्विनी सिंह जिस थाने में प्रभारी बनाए गए, वहां से विवादित होकर ही विदा हुए। इसके बावजूद उन पर कृपा बरसती रही और वह थाना प्रभारी बनाए जाते रहे। वह दो साल में चार थानों के प्रभारी बने लेकिन हर बार विवादों के केंद्र में रहे। चौक कोतवाली में तैनाती के समय सिपाही से गालीगलौज, छेड़खानी की पीड़िता से अभद्रता आदि आरोप लगे। सिपाही से गालीगलौज के मामले में बेहद सुस्त गति से विभागीय जांच भी चल रही है। इसके बावजूद वह चौक कोतवाली इंस्पेक्टर बने रहे। नए एसपी के आने के बाद 11 मई को इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार को शहर से हटाकर अपेक्षाकृत कम महत्व के जैतीपुर थाने में भेज दिया गया। एक महीना भी नहीं बीता कि उन पर निलंबन की गाज गिर गई।
यह था मामला
बरेली के थाना सुभाषनगर की शांति विहार कॉलोनी निवासी मुनीश शर्मा के बेटे अखिलेंद्र का शव 21 दिसंबर 2024 को जैतीपुर के नौगवां गोविंदपुर गांव में पड़ा मिला था। पिता मुनीश कुमार शर्मा ने हत्या का शक जताया था। उन्होंने अपने तहेरे भाई बदायूं के दातागंज के गांव झुकसा व वर्तमान में बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र के रघु वाटिका कॉलोनी इटरुआ रोड निवासी सेवानिवृत्त सैनिक सुधांशु शर्मा समेत चार लोगों को नामजद किया था। इसी मामले में सिपाही विवेक कुमार इंस्पेक्टर के नाम पर सुधांशु शर्मा से 35 हजार रुपये रिश्वत मांग रहा था।
2025 में पाई थी नियुक्ति
बुलंदशहर जिले के थाना शिकारपुर के गांव शिवनगर धूंसरी निवासी 33 वर्षीय विवेक कुमार जून 2025 में पुलिस में भर्ती हुआ था। ट्रेनिंग के बाद 24 अप्रैल 2026 को जैतीपुर थाने में पहली नियुक्ति मिली थी। वह थाना प्रभारी अश्वनी कुमार का हमराही था।
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पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषी मिलने पर इंस्पेक्टर और सिपाही के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सिपाही को बर्खास्त किया जा सकता है।
-सौरभ दीक्षित, एसपी