शाहजहांपुर। कोहरा और पाला के चलते सर्दी का कहर सोमवार को भी जनजीवन पर हावी रहा। इस वजह से रात में न्यूनतम तापमान भी दो डिग्री घटकर पांच डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि अधिकतम पारा 15 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहा। सुबह सूर्योदय के दो घंटे बाद तक कोहरे की चादर छाई रही। हालांकि बाद में धूप निकली, लेकिन शीतलहर बनकर चल रही उत्तर पश्चिम दिशा की हवा के कारण धूप में ज्यादा गर्माहट नहीं रही। कृषि विशेषज्ञों ने लगातार घटते तापमान के कारण रबी फसलों में कीट-रोग पनपने की आशंका जाहिर कर किसानों को कृषि रक्षा रसायनों का प्रयोग करने की सलाह दी है।
रविवार की आधी रात के बाद बैरोमीटर का पारा उछलना शुरू हुआ तो उसी अनुपात में हवा की गति बढ़ने लगी और सुबह तक शरीर जमा देने वाली सर्दी हो गई। कोहरा उड़ने के साथ ओस की बूंदों जैसा पाला गिरने से इतनी सर्दी हो गई कि हाथ, पैर, चेहरा आदि शरीर के खुले अंग सुन्न पड़ने लगे। दोपहर को धूप में थोड़ी तेजी आने पर जनजीवन सामान्य हुआ, लेकिन तब तक शीतलहर चुभने लगी।
गरीब तबके के लोगों को भीषण सर्दी से बचाव करना कठिन हो रहा है। हालांकि, शहर में प्रमुख स्थानों पर नगर निगम और प्रशासन की ओर से अलाव जलवाए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों मेें अलाव लगवाने की जरूरत नहीं समझी गई। मिर्जापुर क्षेत्र में ठंड से परेशान गरीब-बेसहारा लोग कूड़ा-करकट और पुराने टायर-ट्यूब जलाकर बचाव कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव के संभावित प्रत्याशी भी टिकट पाने के लिए लखनऊ-दिल्ली की दौड़ लगाने के फेर में गरीबों की मदद करना भूल गए हैं। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार वायुदाब में देर शाम आई गिरावट को देखते अगले 24 घंटे तक मौसम में सुधार होने के कोई संकेत नहीं हैं।
इस तरह फसलों को कीट-रोगों से बचाएं
शाहजहांपुर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी शिवशंकर गौतम का कहना है कि वर्तमान समय मेें तापमान मेें तेजी से हो रही गिरावट के कारण रबी फसलों में विभिन्न कीट-रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है। ऐसे मौसम में गेहूं, चना, मटर, मसूर, राई-सरसों, आलू आदि फसलों में करनाल बंट, कंडुआ, पिछैती झुलसा, माहू आदि का प्रकोप बढ़ने पर इन फसलों की औसत उत्पादकता प्रभावित होगी।
उन्होंने बताया कि राई-सरसों को माहू, पत्ती सुरंगक, पत्ती धब्बा, सफेद गेरुई और तुलसिता रोग से बचाने के लिए एजाडिरेक्टिन, डाईमैथोएट, जिनेब, मैंकोजेब अथवा मेटालैक्सिन कृषि रसायनों का उचित मात्रा में पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना लाभकारी होगा। चना का जनपद में रकबा बहुत कम है, लेकिन मटर को फली बेधक, सेमीलूपर और अन्य मौसमी कीटों से बचाने के लिए भी उपरोक्त पेस्टीसाइड कारगर साबित होंगे।
मटर में बुकनी रोग के नियंत्रण को घुलनशील गंधक और आलू को पिछैती झुलसा से बचाने के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, जिनेब अथवा मैंकोजेब में किसी एक रसायन का छिड़काव के तोर पर प्रयोग करना चाहिए। संवाद