शाहजहांपुर। अब स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मेट बनकर मनरेगा योजना के कामों की निगरानी करेंगी। इस संबंध में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) के निदेशक की ओर से पत्र जारी कर दिया गया है।
एसआरएलएम के संयुक्त मिशन निदेशक प्रदीप कुमार की ओर से जारी पत्र में महिला मेट के चयन ओर उनके कार्य दायित्व के जो मानक तय किए हैं, उनके आधार पर महिलाओं को उसी ग्राम पंचायत मेें कार्य करने का मौका मिलेगा, जहां की वह मूल निवासी हैं। समूह की महिला का मेट के रूप में चयन 20 से 40 श्रमिकों पर होगा। चयन उसी महिला का हो सकेगा, जिसका समूह छह माह पूर्व गठित हो चुका हो। साथ ही समूह में ऋण वापसी की दर 60 प्रतिशत से अधिक हो और समूह की बचत तीन हजार रुपये से अधिक होनी चाहिए। इस तरह महिला मेट चयन पात्रता के दायरे में वही समूह लाए जाएंगे, जो बेहतर तरीके से संचालित हो रहे हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत जिले में महिलाओं के 510 स्वयं सहायता समूह गठित हैं। इन समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सरकार ने विभिन्न कार्य सौंपे हैं। विभिन्न ब्लॉकों के गांवों में सरकारी कोटे की 12 दुकानों का संचालन स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कर रही हैं। कई समूहों की महिलाएं बिजली बिलों के वितरण और राजस्व वसूली का प्रशिक्षण ले चुकी हैं। पिछले साल वर्ष विभाग स्तर पर महिलाओं के 90 स्वयं सहायता समूह गठित कर प्रत्येक समूह से आठ से 12 महिलाएं जोड़ी गईं। इन समूहों की करीब एक हजार महिलाओं को गन्ने की न्यूनतम मात्रा से अधिकतम गन्ना बीज बनाने को बड चिप विधि से पौध तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।
जनपद की सभी 1069 ग्राम पंचायतों में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मनरेगा मेट के तौर पर नियुक्त करने की तैयारी की जा रही है। विभिन्न ग्राम पंचायतों के लिए करीब 400 महिलाओं का मनरेगा मेट के तौर पर चयन भी किया जा चुका है। किसी गांव में एक कार्य दिवस में 20 श्रमिकों से कार्य लेने पर मेट को 375 रुपये पारिश्रमिक दिया जाएगा। - हसीब अंसारी, मनरेगा उपायुक्त