शाहजहांपुर। केंद्रीय बजट मंगलवार को आ गया। सुबह से ही बजट पर लोगों की नजर रही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट पेश करने के बाद दिन भर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। किसी ने बजट को सभी के हित में बताया, तो कुछ लोगों का कहना है कि बजट चुनावी रहा। सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित न रहकर योजनाएं को धरातल पर भी उतरना चाहिए, ऐसी अपेक्षा सभी को है। खिरनीबाग स्थित बिस्मिल पार्क में बजट पर चौपाल में लोगों ने अपनी बात रखी।
प्रतिष्ठित आयुर्वेद चिकित्सक और योग प्रशिक्षक डॉ. अवधेशमणि त्रिपाठी ने कहा कि बजट अच्छा है, लेकिन इस पर चुनाव का भी असर है। बोले कि मध्यम वर्ग का ख्याल रखना चाहिए था, जोकि सबसे ज्यादा महंगाई से जूझ रहा है तथा धीरे-धीरे गरीब की श्रेणी में आता चला जा रहा है। टैक्स में छूट व नौकरियां बढ़ाने की घोषणा हुई है, यह अच्छी बात है।
अधिवक्ता दुर्गेश चंद्र मिश्रा का कहना है कि केंद्र सरकार का बजट रोजगारपरक है। इससे रोजगार की समस्या का काफी हद तक समाधान निकलेगा। टैक्स में राहत दी गई हैं, इससे तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। अधिवक्ता अरुण कुमार ने बोले कि केंद्र सरकार ने बजट जनता को ध्यान में रखकर बनाया है। आज के समय में तनाव अधिक होने से मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। मानसिक रोगियों के इलाज के लिए व्यवस्था बनाने की घोषणा बजट की है, इससे बहुत से लोगों को लाभ मिलेगा।
आईटी फर्म में सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रेयांश मणि त्रिपाठी ने कहा कि 60 लाख नौकरियां देने की घोषणा की गई, इससे युवाओं को बहुत राहत मिलेगी। एनटीपीसी वाले नौकरी के लिए विरोध कर रहे थे, उनको भी इसका लाभ मिलेगा। मानसिक रोगियों के स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाना भी अच्छा कदम है।
शिवम सक्सेना ने बेबाकी से अपनी बात रखी और कहा कि कोरोना के कारण जो लोग स्कूल-कॉलेज नहीं जा पा रहे थे, उनके लिए डिजिटल यूनिवर्सिटी बनाए जाने की घोषणा की गई है। क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स लगाया गया है। बजट में जितने भी सही कदम उठाने चाहिए थे, वह सभी है। सभी किसी एक व्यक्ति के लिए पूरे देश के लिए बनाया गया है। बहुत सही बजट है।
नीरज सक्सेना ने कहा कि बजट सही है, लेकिन महंगाई को नियंत्रित करने पर ध्यान देना चाहिए था। डॉ. कमलेश वाजपेयी का कहना है कि लोकप्रिय और सर्वस्पर्शी बजट आया है। समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है, विशेषकर गरीबों का मकान बनाने की घोषणा करना सराहनीय कदम है।
प्रवेश अवस्थी बोले कि बजट सही है, बड़े-बुजुर्गों की राय के साथ हैं। लेकिन देखने वाली बात है कि यह सब जुमला है या हकीकत में बजट की घोषणाओं का लाभ लोगों को मिलेगा। 15 लाख रुपये खाते में आने, किसानों की आय दोगुनी करने, फसलों का सही मूल्य मिलने के पुराने वायदे ही पूरे नहीं हो पाए हैं। बजट की नई घोषणाओं से कोई उम्मीद नहीं है।