शाहजहांपुर। भगवान सूर्य की आराधना का पर्व छठ सोमवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो रहा है। इस पर्व की पूर्वांचल और बिहार में काफी धूम रहती है। शहर में भी गर्रा व खन्नौत नदी के घाटों पर छठ पर्व की रौनक देखते ही बनती है। पूर्वांचल और बिहार से आकर यहां रहने वाले परिवार छठ पर्व धूमधाम से मनाते हैं। त्योहार को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
छठ पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को मनाया जाता है। सुहागिन महिलाएं और पुरुष छठ व्रत रखते हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक छठ पर्व मनाया जाता है। सोमवार को चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय के साथ छठ पर्व की शुरुआत होगी। इस दिन घरों में साफ-सफाई के साथ सादा भोजन (लौकी की सब्जी और भात) किया जाएगा। मंगलवार को पंचमी पर पूरे दिन व्रत रहेगा। इस दिन खरना होगा। इसमें चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर हंडिया में पकाई गई खीर के साथ रोटी खाई जाती है। मंगलवार रात से व्रत शुरू हो जाएगा।
शाम को ही चौरा में दउरा और सूप में फल, फूल, नारियल व अन्य सामग्री रख दी जाएगी। अखंड ज्योति जलाकर मां का पूजन-अर्चन किया जाएगा। बुधवार को छठ पर व्रत धारण करने वाले जल का भी सेवन नहीं करेंगे। शाम के समय अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर फल, पकवान, पुष्प, आदि अर्पित किए जाएंगे।
छठी मैया से सुख-समृद्धि व दीर्घायु की कामना की जाएगी। सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरेंगी। रात भर निराहार रहकर जागरण किया जाएगा। बृहस्पतिवार सुबह सूर्योदय से पूर्व नदी या सरोवर में स्नान कर उदित होते भगवान सूर्य की पूजा की जाएगी। अर्घ्य देकर जल पिया जाएगा, जिसके साथ व्रत का पारायण होगा।
व्रत के नियम
- व्रत धारण करने वाली महिलाएं जमीन पर सोती हैं। गेहूं और चावल को धोकर सुखाया जाता है। गेहूं को चक्की पर पीसकर आटे से ठेकुआ बनाया जाता है। पिसे हुए चावल का लड्डू बनाकर छठी मैया को अर्पित किया जाता है।
प्रसाद में बनाया जाता है ठेकुआ
- छठ व्रत में मुख्य प्रसाद ठेकुआ होता है। यह गेहूं के आटे, गुड़, देशी घी से अर्घ्य के लिए मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर बनाया जाता है।
दूध से करते हैं अर्घ्य दान
- फलों में सामर्थ्य के अनुसार मौसमी फलों नारियल, पपीता, केला, सेब, कंद, अनार, सुथनी, ईख, सिंघाड़ा, शरीफा, कंदा, अनानास, संतरा, नीबू, पत्तेदार हल्दी व अदरक, कोहड़ा, बोरो, मूली, अल्ता के पात, पानी सुपारी, मेवा आदि और गाय के दूध से अर्घ्य दान किया जाता है।
बहुत कठिन है व्रत, अपनी परपंरा निभाएंगे
छठ पर्व की शुरुआत सोमवार से होगी। बृहस्पतिवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पर्व का संपन्न होगा। यह व्रत बहुत कठिन है। फिर भी हम अपनी परंपरा को निभाएंगे। व्रत रखकर सूर्य देवता का पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। - मृदुला सिंह
हर साल छठ पर्व मनाते हैं, इस बार भी पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखकर भगवान सूर्य देव की आराधना करेंगे। छठ पर्व को लेकर तैयारियां कर ली है। नहाय-खाय के साथ इसकी शुरुआत होगी। 10 को डूबते व 11 को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। - जानकी मिश्रा
पिछले 30-35 सालों से छठी मैया का व्रत करती आ रही हूं। छठ माता में गहरी आस्था है। मन से आज तक जो भी मन्नत मांगी है, वह पूरी हुई है। जब तक शक्ति रहेगी व्रत रखती रहूंगी। छठ पर्व को लेकर घर में तैयारियां चल रही है। धूमधाम से पर्व मनाएंगे। - सरोज बाला
छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। इसमें पूरे दिन घर की साफ-सफाई की जाती है। स्नान के बाद व्रत संकल्प लिया जाता है। चना, दाल, कद्दू, लौकी की सब्जी और चावल का प्रसाद बनाकर ग्रहण किया जाएगा। छठ पूजा को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। - ऊषा सिंह
छठ पर्व पर महिलाएं ही नहीं पुरुष भी व्रत रखते हैं। इस पर्व को मनाने की परंपरा बिहार और पूर्वांचल में है, लेकिन जो लोग नौकरी में हैं और यहां आकर रहने लगे हैं, यहीं रहकर अपनी परंपरा को निभा रहे हैं। इस बार भी छठ पर्व को धूमधाम से मनाया जाएगा। - विनोद सिंह
शहर में सैकड़ों परिवार हैं, जोकि छठ पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। सभी लोग इस बार भी छठ पर्व को पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाएंगे। छठ पर्व को लेकर पूर्वांचल के लोगों के खासा उत्साह है। खन्नौत नदी के घाट पर डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा - विपुल प्रसाद