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कोलाघाट पुल: सहारनपुर अभियंताओं ने पुल के शेष पिलर पर लगाए निशान, होगी जांच

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कोलाघाट पुल गिरने के बाद रविवार को दोबारा पहुंचे सेतु निगम व लोनिवि के अधिकारी। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर/जलालाबाद। पिलर धंसने से क्षतिग्रस्त हुए कोलाघाट पुल के कारण कलान मिर्जापुर क्षेत्र में प्रभावित हुई यातायात व्यवस्था बहाल होने में कम से कम दो सप्ताह का समय लग सकता है। फिलहाल क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लोगों को रामगंगा के दलदली रेतीले तटों पर पैदल पहुंचकर नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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कोलाघाट पर अस्थायी पुल के लिए रविवार को कई पैंटून पहुंच गए और पैंटून पुल की एप्रोच रोड के लिए मिट्टी का कार्य भी शुरू कर दिया। इस बीच, सहारनपुर से लोक निर्माण विभाग (मेरठ जोन) के मुख्य अभियंता संदीप कुमार, सेतु निर्माण निगम के मुख्य अभियंता अशोक अग्रवाल समेत कइ अभियंताओं की टीम ने पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास के कई अन्य पिलरों की जांच के लिए उन पर निशान लगाए हैं।
कंक्रीट के 59 पिलर्स पर बनाए कोलाघाट पुल का जलालाबाद की ओर से सातवां पिलर गत 29 नवंबर की रात धंस जाने के कारण पुल टूटकर तीन भागों में बट गया था। तभी से माना जा रहा था कि यदि बीते माह आई बाढ़ के कारण सात नंबर पिलर सतह की मिट्टी परत कटने के कारण धंसा है तो आसपास के अन्य कई पिलर भी भविष्य में पुल के अस्तित्व को खतरा बन सकते हैं। जांच करने पहुंचे लोनिवि और सेतु निगम के मुख्य अभियंताओं ने भी पुल के बाकी हिस्सों का जायजा लेने के बाद यही आशंका जाहिर करते हुए नदी की मुख्य धारा के आसपास स्थित अन्य पिलर भी तकनीकी जांच को चिह्नित किए हैं।
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इन सभी पिलर्स की भू सतह पर निशान लगाए हैं ताकि 15 दिन बाद उनकी जांच करने पर यह पता लगाया जा सके कि किसी पिलर के नीचे की मिट्टी की भार वहन क्षमता तो कम नहीं हो रही। सेतु निगम के मंडल परियोजना प्रबंधक ब्रजेंद्र सिंह और अवर अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि सोमवार से पुल के नीचे मृदा परीक्षण का शेष काम दोबारा शुरू करा दिया जाएगा, लेकिन पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का निर्माण मृदा के सभी नमूनों की लैब से परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही शुरू हो सकेगा।
इधर, लोक निर्माण विभाग (निर्माण खंड-1) के अधिशासी अभियंता राजेश चौधरी ने रामगंगा के दोनों ओर पैंटून पुल के लिए चिह्नित स्थान पर एप्रोच रोड के लिए मिट्टी के समतलीकरण का काम शुरू करा दिया। नाव के सहारे नदी पार करने को तट तक पहुंचने वाले लोगों की सहूलियत के लिए कीचड़ वाले स्थानों पर मिट्टी का भराव कराया जा रहा है। यह काम जेसीबी से कराया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि काम काफी धीमी रफ्तार से हो रहा है और उसमें तेजी लाने को एक साथ कई जेसीबी लगाई जानी चाहिए।
कीचड़ भरे रास्ते पर गिरकर निकल रहे लोग
कोलाघाट पुल टूट जाने के बाद क्षेत्रवासियों पर मानो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा है। जरूरी कार्य से जलालाबाद-शाहजहांपुर जाने आने वाले लोगों के साथ ही महिलाएं और बच्चे कीचड़युक्त रास्ते में गिर-गिरकर निकल पा रहे हैं। बाइक सवार कीचड़ से बाइक निकलवाने के लिए दस रुपये खर्च करके स्थानीय युवाओं का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, प्रशासन टूटे हुए पक्के पुल के पश्चिम कीचड़ और पानी भरे रास्ते मे मिट्टी डालकर यातायात योग्य बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन रोजाना जलालाबाद आने-जाने वालों के लिए पुल टूटना मुसीबत बन गया है।
नया ट्रैक्टर खरीदने जलालाबाद गया था। पैसे अग्रिम जमा कराकर एजेंसी स्वामी ने ट्रैक्टर देने के लिए शनिवार को बुलाया था। ट्रैक्टर भी नहीं मिला और कीचड़ भरे रास्ते में कई जगह फिसलकर गिरने से हालत खराब हो गई। -समर सिंह, सिंगहा युसुफपुर (मिर्जापुर)
जलालाबाद के खाईंखेड़ा गांव में गंभीर बीमार रिश्तेदार को देखने गया था। एक तरफ से नाव की उतराई 20 रुपये देने के बाद कीचड़ में गिर उठकर किसी तरह निकल पाया। अब पक्का पुल बनने से पहले दोबारा नहीं आऊंगा। -सत्येंद्र सिंह, ग्राम बरेनिया, उसावां (बदायूं)
बेटी के लिए रिश्ता देखने मई खुर्द कलां जा रहा हूं। लोगों ने पुल टूटने के बाद नदी में नाव चलने की बात बताई थी। जैसे-तैसे यहां तक पहुंच सका। अधिकारी कीचड़ भरे रास्ते पर मिट्टी डलवा दें तो निकलना आसान हो जाएगा। -आमिर हसन, बाड़ी गांव (शाहजहांपुर)
जलालाबाद जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन कीचड़ से निकलते समय फिसल गया। इससे चोट लग गई और कपड़े भी खराब हो गए। इसलिए वापस घर लौटकर जाना पड़ रहा है। अब अल्हागंज होकर जाना पड़ेगा। -यशवीर सिंह, दहेलिया (मिर्जापुर)
कोलाघाट पुल का ढांचा निर्माण संबंधी किसी खामी से नहीं, बल्कि भूगर्भीय कारणों से क्षतिग्रस्त हुआ है। इसीलिए पुल के अन्य पिलर्स की भी तकनीकी जांच कराने का निर्णय किया है। पिलर्स की सतह पर निशान लगाए हैं और 15 दिन बाद निशान के आधार पर पता लगाया जाएगा कि भविष्य में उनके धंसने का खतरा तो नहीं है। पिलर्स की तकनीकी जांच और पुल के नीचे लिए गए मिट्टी के नमूनों की जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्माण संबंधी कार्य तय होंगे।
-संदीप कुमार, मुख्य अभियंता, लोनिवि (मेरठ जोन)

कोलाघाट पुल के नीचे में कीचड़युक्त रास्ते से निकलते ग्रामीण। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

कोलाघाट पुल के नीचे मिट्टी डालकर रास्ता बनाते लोनिवि के श्रमिक। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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