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होली पर गरमाया बाजार, 1.25 अरब रुपये से ज्यादा का हुआ कारोबार

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शाहजहांपुर। दो वर्ष तक होली-दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर कोरोना काल में कई चीजों का कारोबार लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित रहा था। इस बार महामारी के बादल छंटे तो सरकार से सभी दुकानें देर तक खोलने की छूट मिली तो होली पर दस दिन तक बाजार गरमाया रहा। अगर होली से पहले सिर्फ पांच दिन के कारोबार पर नजर डालें तो मावा, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, कपड़ा, रेडीमेड वस्त्र, कंफैक्शनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि चीजों की बंपर बिक्री हुई। दुकानदारों का मानना है कि होलाष्टक के बाद से होली के दिन तक विभिन्न वस्तुओं का करीब 1.25 अरब रुपये से अधिक कारोबार होने का अनुमान है।
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होली के दौरान सबसे ज्यादा मुनाफा कपड़ा, रेडीमेड और वाहन कारोबारियों ने कमाया। जिले में विभिन्न कंपनियों के फोर व्हीलर और टू व्हीलर वाले करीब दो दर्जन शोरूम हैं। कई वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा आकर्षक योजनाएं लागू करने से चार पहिया वाहनों के समानांतर दो पहिया वाहन भी खूब बिके। कमाई के लिहाज से मावा, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, नमकीन के विक्रेता दूसरे नंबर पर रहे। होली से पहले पांच दिन तक सिर्फ केरूगंज की खोवा मंडी में रोजाना औसतन 200 क्विंटल मावा की आवक हुई। मावा का औसत रेट 250 रुपये किलो मान लिया जाए तो सिर्फ खोवा मंडी मेें 2.5 करोड़ रुपये का खोवा बिक गया।
मंडी मोड़ के मिठाई कारोबारी आकाशदीप के अनुसार जितना खोवा मंडी में बिका, उससे अधिक मावा की फुटकर बिक्री मिठाई की दुकानों पर हुई। इसके अलावा लोगों ने पांच दिन में लगभग दो करोड़ रुपये गुझिया और मिठाइयों की खरीद पर खर्च कर डाले। इसी तरह करीब पांच करोड़ रुपये के सूखे मेवा और तरह-तरह की नमकीन बिक गई। हालांकि, सदर बाजार के कंफैक्शनरी कारोबारी नरेश कौशल का कहना है कि इस बार महंगाई के कारण ड्राई फ्रूट और नमकीन की बिक्री पिछली होली की तुलना में 25 फीसदी कम रही, लेकिन रेट बढ़ने के बावजूद लोगों ने त्योहार की खरीदारी में बहुत उत्साह दिखाया। इसी तरह ग्राहकों की जेब से निकले पांच करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉनिक्स और किराना प्रतिष्ठानों पर पहुंचे।
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पांच दिन में व्यवसाय वार हुआ कारोबार
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खोवा 5.00 करोड़ रुपये
आटोमोबाइल 7.50 करोड़ रुपये
कपड़ा 50.00 करोड़ रुपये
किराना 2.50 करोड़ रुपये
रेडीमेड वस्त्र 40.00 करोड़ रुपये
इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रॉनिक्स 2.50 करोड़ रुपये
ड्राई फ्रूट्स व नमकीन 5.00 करोड़ रुपये
रंग, पिचकारी और फल 7.00 करोड़ रुपये
(आंकड़े कारोबारियों के अनुमान पर आधारित)
होली पर मिठाइयों का प्रचलन कम होता है, लेकिन जो लोग गुझिया बनाने के लिए खोवा नहीं खरीद सके या फिर जिन घरों में गुझिया बनाने का समय नहीं बचा, वहां खोवा और दूध की मिठाइयों की खपत हुई। मावा होली के पांच दिन पहले से आना कम हो गया और इसीलिए उसके भाव डेढ़ गुना हो गए।
-संजीव राठौर, मिठाई विक्रेता
जिले में कपड़ा की लगभग पांच सौ दुकानें हैं। सभी ने होली के साथ सहालगी सीजन की तैयारी की थी और इसका कारोबारियों को इस बार पूरा लाभ मिला। हर दुकान पर रोजाना औसतन 25 हजार रुपये से ज्यादा की बिक्री हुई जबकि बड़े प्रतिष्ठानों पर बिक्री का दैनिक आंकड़ा दो लाख रुपये से पार कर गया।
-सुनील तुली, कपड़ा कारोबारी
जिन घरों में शादियां होनी हैं, वहां के लोगों ने होली के पहले से खरीदारी शुरू कर दी हैं। बाद में उन लोगों ने रेडीमेड कपड़े खरीदे जो त्योहार के लिए दर्जी को समय से कपड़े सिलने को नहीं दे सके। जिले की करीब पांच सौ दुकानों पर रोजाना लगभग दो करोड़ रुपये की त्योहारी बिक्री हुई। सहालगी खरीदारी जोड़ देें तो बिक्री का आंकड़ा दोगुना हो जाएगा।
-हनी सिंह, रेडीमेड वस्त्र कारोबारी
करीब आधा दर्जन से अधिक फोर व्हीलर और टू व्हीलर कंपनियों के जिले में लगभग दो दर्जन शोरूम हैं। एक एजेंसी पर दो गाड़ियों की औसत बिक्री 20 लाख रुपये मान ली जाए तो होली के 15 दिन पहले से एक करोड़ रुपये से अधिक का दैनिक कारोबार होने का अनुमान है।
-चरनजीत सिंह दुआ, वाहन व्यवसायी
जिले में कंफैक्शनरी की 10-15 बड़ी और 50 से 60 तक छोटी दुकानें हैं। इन सभी दुकानों पर ड्राई फ्रूट, पैकेज्ड मिठाईयों, कोल्ड ड्रिंक, नमकीन आदि की खूब बिक्री हुई। हालांकि, इस बार सूखे मेवा के दाम 15 से 20 प्रतिशत बढ़ गए और इस वजह से पिछले साल की तुलना में बिक्री कम हुई, फिर भी रोजाना औसतन एक करोड़ रुपये लोगों ने इस चीजों पर खर्च किए।
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-नरेश कौशल, कंफैक्शनरी व्यवसायी
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