सिर्फ जलालाबाद में सपा को मिली जीत, बसपा का खाता नहीं खुला
तिलहर में रही कांटे की टक्कर तो पुवायां में चली चेतराम की आंधी
कटरा सीट से निर्वाचित वीर विक्रम सिंह प्रिंस सबसे युवा विधायक
आंकड़े़ बताते हैं कि जिले में जिस दल के खाते में भी तीन सीटें आती हैं, सूबे में सरकार उसी की बनती है लेकिन विधानसभा चुनाव-2017 के शनिवार दोपहर बाद घोषित परिणाम सियासी पंडितों के लिए खासा चौंकाने वाले रहे। भाजपा ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए छह में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की। सपा सिर्फ जलालाबाद में ही जीत पाई तो बसपा का खाता तक नहीं खुला जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा की लहर में भी बसपा ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। जिले में कटरा से भाजपा के टिकट पर जीते वीर विक्रम सिंह प्रिंस जिले में सबसे कम उम्र के विधायक बने हैं। तिलहर सीट पर भाजपा को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिली लेकिन अंतत: 5705 मतों से जीत गई। पुवायां में मुकाबला लगभग एकतरफा रहा। भाजपा प्रत्याशी चेतराम पासी के पक्ष में मतों की आंधी रही। वह 72496 मतों से जीते।
भाजपा की इस रिकार्ड जीत में प्रत्याशियों के चयन के अलावा सूझबूझ वाली खामोशी से लहर बनाने की रणनीति रही। उसी क्रम में स्टार प्रचारकों की सभाओं का चयन काफी सोच समझकर किया गया ताकि वोटरों में आखिरी क्षणों में उनका प्रभाव पड़ सके। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की तिलहर विधानसभा क्षेत्र में निगोही के पास और कटरा में की गई सभा इसी कड़ी का हिस्सा रहीं। ददरौल में चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मानवेंद्र सिंह के पक्ष में मजबूत माहौल बनाने के लिए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती पार्टी के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को लेकर सभा पहुंचे। शहर में महिला मतदाताओं को एकजुट करने में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की सभा भी अहम रही। पुवायां में कांग्रेस के टिकट पर चार बार विधायक रहे चेतराम के बेटे को प्रत्याशी बनाने की तैयारी आखिरी क्षणों में भाजपा के रणनीतिकारों ने बदल दी तो सपा की शकुंतला देवी से उकताई क्षेत्र की जनता ने वहां भी भारी अंतर से जीत का इतिहास रच डाला।
सपा-कांग्रेस गठबंधन का जिले में सत्ता विरोधी लहर के साथ ही टिकट बंटवारे के दौरान मुख्यमंत्री के परिवार में मची सियासी कलह ने भी काफी बंटाधार किया। नतीजा यह हुआ कि पुवायां तो हाथ से फिसला ही ददरौल से विधायक, राज्यमंत्री रहे राममूर्ति सिंह वर्मा और कटरा से दो बार विधायक रहे राजेश यादव को भी हार का स्वाद चखना पड़ा। जलालाबाद में बसपा के टिकट पर दो बार जीत चुके नीरज कुशवाहा के खिलाफ जनता में बह रही बदलाव की बयार को सपा के पूर्व विधायक शरदवीर सिंह अपने पाले में करने में सफल रहे। उन्होंने भाजपा के मनोज कश्यप को पटखनी दी। तिलहर में सपा गठबंधन से कांग्रेस के प्रत्याशी जितिन प्रसाद की साख दांव पर लगी थी लेकिन वह उसे बचा नहीं पाए क्योंकि वह किसान बिरादरी बहुल इस क्षेत्र में मौजूदा विधायक के गांव-गरीब बनाम कोठी के मुद्दे की काट नहीं निकाल सके।
बसपा का प्रदर्शन इस बार जिले में सबसे खराब रहा। सभी छह सीटों पर यह तीसरे स्थान पर रही। पिछले चुनाव में जलालाबाद और तिलहर की सीटें जीतने वाली बसपा के खाते में यह दोनों सीटें पहले से थीं। कांग्रेस छोड़कर दो साल पहले बसपा में आए और ददरौल से प्रत्याशी घोषित किए गए मानवेंद्र सिंह का आखिरी क्षणों में टिकट काट देने का भी पूरे जिले में नकारात्मक संदेश गया था। उससे पहले तिलहर से विधायक रोशन लाल वर्मा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते हुए पिछले चुनाव में पार्टी से निकाले गए अवधेश वर्मा को इस बार यहां से उतारे जाने का भी असर पार्टी के खिलाफ दिखा। ददरौल से दो बार बसपा केे टिकट पर जीत कर बसपा सरकार में मंत्री रहे अवधेश वर्मा गत चुनाव में पार्टी से निकाले जाने पर भाजपा में शामिल हुए लेकिन दूसरे स्थान पर रहे थे। इस बार अंतिम समय में उन्हें नई सीट से उतारा जाना भी हार की एक बड़ी वजह रही क्योंकि क्षेत्र में वह उतना नहीं घूम पाए जितना कि मौजूदा विधायक वोटरों के बीच लगातार बने रहे।