शाहजहांपुर। मंगलवार तीन मई को विश्व अस्थमा दिवस होगा। अस्थमा सिर्फ बुजुर्गों को नहीं, बल्कि युवाओं और नौजवानों को भी घेर रहा। इसका प्रमुख कारण एलर्जी बन रही है। इसकी चपेट में आने वाले में अधिकतर महिलाएं हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अस्थमा से पीड़ित पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा आती हैं। डॉक्टरों का मानना है कि रोग से बचने के लिए खुद ही सावधानी बरतने की जरूरत है।
पिछले कुछ वर्षों में अस्थमा के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। अब तो हर उम्र के लोग अस्थमा रोग की चपेट में आ रहे हैं। यह रोग अधिकतर एलर्जी की वजह से होता है। इसलिए डॉक्टर भी एलर्जी वाली चीजों से बचने की सलाह देते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. ऋषभ बताते हैं कि उनके पास हर दिन आने वाले मरीजों में महिलाएं ज्यादा हैं। उन्होंने बताय कि पंप में इनहेलर से दवा लेते रहना चाहिए। सांस लेने की गंभीर बीमारियों के बढ़ते बोझ का कारण वायु प्रदूषण को माना जा सकता है। नियमित दवाइयों का सेवन कर रोग से लड़ा जा सकता है। संवाद
अस्थमा के लक्षण
व्यायाम के बाद खांसी, सांसों की कमी, नियमित खांसी, घबराहट, छाती में जकड़न, सोने में परेशानी आदि
-अस्थमा होने का प्रमुख लक्षण एलर्जी, धूम्रपान, प्रदूषण, मोटापा, तनाव आदि होता है। धूल, मिट्टी या बागवानी का काम करने वाली लोगों को अस्थमा का रोग ज्यादा होता है। इससे लोगों को बचना चाहिए। ऐसी जगह पर जाने पर मास्क का प्रयोग करें। नियमित दवाई का सेवन करने से रोग से लड़ा जा सकता है। -डॉ.ऋषभ, फिजिशियन, राजकीय मेडिकल कॉलेज