शाहजहांपुर। होली पर तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इनमें सर्वाधिक खपत दूध से बनी मिठाइयों या फिर मावा से तैयार गुझिया की होती है। इसीलिए मिलावटखोर अन्य चीजों के अलावा दूध में घालमेल करने में जुटे हैं। घर-घर गुझिया बनाने की परंपरा होने के कारण जैसे-जैसे मावा की मांग बढ़ रही है, उसमें आलू, शकरकंद, मैदा आदि स्टार्च युक्त पदार्थों की मिलावट बढ़ गई है।
दूध विक्रेता अधिकांश दूध मावा बनाने में खपा रहे हैं। इसलिए घरों में पहुंचने वाले दूध में पानी की मात्रा भी बढ़ गई है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) दूध के नमूने लेने का दो दिवसीय मासिक अभियान चला रहा है, लेकिन केरूगंज खोयामंडी समेत मिठाई की दुकानों पर अभी तक नमूना लेने का अभियान शुरू नहीं किया है।
इस समय दूध की शुद्धता राम भरोसे
होली के दो सप्ताह शेष बचे हैं, इसलिए दूध से खोया अभी से बनाया जाने लगा है। घर-घर जाकर दूध देने वाले दूधिया को उनकी मांग के अनुरूप दूध नहीं मिल रहा है। ऐसे में घरेलू ग्राहक टूटने से बचाने के लिए दूधिया दूध मेें पानी की मिलावट करने लगे हैं। यही नहीं, अधिक मुनाफा कमाने के लिए दूधिया मशीन से दूध की क्रीम निकालकर उसकी अलग से बिक्री कर रहे हैं। दूधिया अपने वाहनों पर कई कंटेनर टांगकर अलग-अलग क्वालिटी का दूध 40 से लेकर 50 रुपये लीटर बेच रहे हैं। डेयरियों पर 55 से 60 रुपये लीटर के भाव बिकने वाले दूध में भी शुद्धता की गारंटी नहीं है।
दूध में पानी मिलाने के बने कई ठिकाने
देहात से साइकिलों और बाइक पर दूध के कंटेनर लाने वाले फुटकर विक्रेताओं ने मिलावट करने के महानगर में कई ठिकाने बना रखे हैं। सुबह सदर बाजार स्थित पंखी चौराहा के पास दूधियों का जमावड़ा लगता है। लाल इमली चौराहा के पास और टाउनहाल में तेल टंकी रोड पर लकड़ी की एक टाल के पास दूधिये इकट्ठा होते हैं। अधिक मात्रा में दूध लाने वालों से छोटे दूधिया मोलभाव कर दूध खरीदने के बाद उसे अलग-अलग कंटेनरों में भरकर पानी की मात्रा के अनुसार दूध के रेट तय करते हैं। मिठाई विक्रेताओं के आगे उनकी दाल नहीं गलती, क्योंकि हलवाई प्रति लीटर दूध की मात्रा तय करने से पहले उसका मावा बनाकर देखते हैं।
दूध, खोया, पनीर के फेल हो चुके कई नमूने
गत वर्ष होली और बाद में दीपावली के दौरान केरूगंज खोया मंडी से लिए खोया के दो नमूने जांच में असुरक्षित पाए गए थे। निगोही क्षेत्र के गांव उदयपुर कटैया निवासी तौफीक खां, जैतीपुर क्षेत्र के गांव नवादा निवासी राजेश यादव, सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के गांव ऐंठापुर निवासी गोविंद और तिलहर के मोहल्ला मोजमपुर निवासी प्रभात गर्ग से लिए दूध के नमूने जांच में फेल होने पर उनके खिलाफ 77000 रुपये जुर्माना किया जा चुका है। तिलहर क्षेत्र के मोहल्ला निजामगंज निवासी धर्मपाल सिंह पर 25 हजार रुपये जुर्माना हो चुका है, क्योंकि उनके पनीर का नमूना अधोमानक पाया गया।
अप्रैल से अब तक दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूने
खाद्य वस्तु निरीक्षण छापे नमूने रिपोर्ट प्राप्त अधोमानक असुरक्षित
दूध 167 53 53 19 05 00
खोया 45 15 15 14 09 00
पनीर 35 09 09 07 06 00
देशी घी 20 05 05 00 00 00
मक्खन 21 01 01 03 00 00
त्योहारी सीजन को देखते खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से दूधियों की निगरानी कराई जा रही है। जिले मेें अभी तक सिंथेटिक दूध का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। दूध के जो नमूने जांच मेें फेल हो रहे हैं, उनमें एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) की कमी पाई जा रही है, जो दूध से क्रीम निकाले जाने और पानी की मिलावट होने की पुष्टि करता है। अभी तक दूध अथवा दुग्ध उत्पादों का ऐसा कोई नमूना नहीं मिला, जिसमें कोई अखाद्य अथवा शरीर के लिए हानिकर वस्तु की मिलावट पाई गई हो। खोया मंडी का जल्द निरीक्षण किया जाएगा। -विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
वर्तमान में बाजार में बिकने वाली खान-पान की कोई वस्तु मिलावट से अछूती नहीं है। ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग दूध पीते हैं, लेकिन उसमें पानी मिला होने से पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल सकेंगे। दूध को फटने से बचाने के लिए उसमें खाने का सोडा अधिक मिला देने की दशा में शरीर में सोडियम तत्व बढ़ने से रक्तचाप बढ़ने का खतरा है। दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसमें फार्मेलीन रसायन मिलाने या फिर गाढ़ापन लाने के लिए यूरिया, डिटर्जेंट आदि मिलाया जाता है। ऐसा दूध पीने से आंतों में सूजन के साथ लीवर, किडनी आदि शारीरिक अंग फेल होने की आशंका है। -डॉ. राजीव सिंह, वरिष्ठ चेस्ट फिजीशियन एवं हृदय रोग विशेषज्ञ