शाहजहांपुर। कोविड-19 के समय में प्लाज्मा का महत्व लोगों को समझ आया। मच्छर जनित रोग डेंगू होने पर भी प्लेट्लेटस के लिए मारामारी मची रहती है। इस संकट को खत्म करने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज प्लाज्मा थैरेपी को अपनाने जा रहा। खून से प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की उपलब्धता के लिए एफेरेसिस मशीन को खरीदने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
अस्पताल में ब्लड बैंक होने के बावजूद बड़े शहरों की तरह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अभी ब्लड से प्लाज्मा और प्लेट्सलेट निकालने में चार घंटे का समय लगता है। डेंगू और कोविड के दौरान प्लाज्मा और प्लेट्सलेट की मांग बढ़ने पर मरीजों के सामने काफी समस्याएं आईं। इस समस्या से निपटने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज प्लाज्मा थैरेपी को अपनाने जा रहा है। ब्लड बैंक के लैब टेक्निशियन रामू नायक की मानें तो एफेरेसिस मशीन लगने से डोनर के ड्रिप लगाने के बाद ब्लड निकलकर मशीन के अंदर जाएगा। मशीन के जरिये खून से प्लेट्लेटस और प्लाज्मा अलग-अलग हो जाएगा। इससे समय की काफी ज्यादा बचत होगी।
46 लाख रुपये की खरीदी जाएगी मशीन
-लखनऊ और बरेली जैसे बड़े शहरों की तरह राजकीय मेडिकल कॉलेज भी 46 लाख रुपये खर्च करने जा रहा। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने शासन को एफेरेसिस मशीन खरीदने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा है। शासन ने प्रस्ताव को स्वीकार भी कर लिया है। माना जा रहा है कि कुछ महीनों में सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मशीन को स्थापित कर दिया जाएगा।
ब्लड बैंक के स्टाफ को दिया जाएगा प्रशिक्षण
- मशीन को संचालित करने के लिए अलग से स्टाफ नहीं रखा जाएगा, बल्कि ब्लड बैंक के स्टाफ को ही प्रशिक्षित किया जाएगा। ट्रेनिंग के लिए लखनऊ से प्रशिक्षक को बुलाए जाने की तैयारी की गई है।
- प्लाजा थैरेपी की तकनीक राजकीय मेडिकल कॉलेज में होना जरूरी है। इसके लिए एफेरेसिस मशीन को लगाकर प्लाज्मा और प्लेटलेट्स को लेकर होने वाली बीमारियों के खात्मे में मदद मिलेगी। मशीन खरीदने के लिए हमारे पास पर्याप्त बजट है। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज