शाहजहांपुर। पेराई सत्र 2021-22 में गन्ना खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए शासन ने उन लोगों पर लगाम कसने की तैयारी कर ली है जो अन्य किसानों के गन्ना की दलाली के लिए अपने रकबा में हेरा-फेरी कर उसे बढ़ाकर दर्शा देते हैं। इस बार विभाग ने घोषणा पत्र में जानबूझ कर गलत रकबा दर्ज करने वालों का गन्ना सट्टा लॉक करने का निर्णय किया है।
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी ने ऑनलाइन घोषणा पत्र भरने की जटिल प्रक्रिया को सरलीकृत करके राजस्व भूमि के प्रमाण के रूप में खतौनी अपलोड करने की व्यवस्था समाप्त कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इस सुविधा का दुरुपयोग करते हुए गन्ना माफिया खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के लिए अपना रकबा भरते समय उसमें परिवर्तन कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने वालों को विभाग आसानी से चिह्नित कर लेगा।
इस तरह की गड़बड़ी की रोकथाम के लिए गन्ना विभाग घोषणा पत्र मेें दर्ज किसानों के रकबे का मिलान राजस्व विभाग द्वारा प्रदत्त भूलेख एपीआई से अनिवार्य रूप से कराएगा। यदि किसी किसान ने जानबूझकर अपने रकबे को गलत दर्शाया तो गलत डाटा भरने पर संबंधित किसान का सट्टा लॉक करते हुए उसे गन्ना मूल्य भुगतान रोक दिया जाएगा और सहकारी गन्ना समिति की सदस्यता भी खारिज कर दी जाएगी। ऐसे लोगों का सट्टा लॉक होने पर उन्हें पेराइ्र सीजन में आगे किसी प्रकार की गन्ना पर्ची भी जारी नहीं की जाएंगी।
जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने बताया कि विभाग के पास गन्ना किसानों का गत पांच वर्ष का महत्वपूर्ण डाटा पहले से उपलब्ध है। साथ ही विभागीय सॉफ्टवेयर में ऐसी व्यवस्था की गई है कि जो किसान अपने गनना क्षेत्रफल में परिवर्तन करेगा, वह ईआरपी सॉफ्टवेयर पर स्वत: चिह्नित हो जाएगा।