शाहजहांपुर। वकील भूपेंद्र सिंह की हत्या के आरोपी सुरेश गुप्ता ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसकी कमीज पर खून के धब्बे भी मिले हैं। आरोपी ने बताया कि भूपेंद्र सिंह पिछले 20 सालों से उनके खिलाफ फर्जी शिकायतें कर रहे थे। 24 मुकदमे उन पर दर्ज करा दिए थे। इसीलिए उसने भूपेंद्र सिंह की हत्या कर दी।
सोमवार करीब साढ़े 11 बजे कचहरी की दूसरी मंजिल पर स्थित एसीजेएम ऑफिस में अधिवक्ता भूपेंद्र सिंह की सिर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भूपेंद्र सिंह ने एसीजेएम ऑफिस में मौजूद एक कर्मचारी से एक केस की फाइल मांगी थी। कर्मचारी फाइल निकालने चला गया, तभी भूपेंद्र को गोली मार दी गई। भूपेंद्र के पैरों के पास एक फाइल पड़ी हुई थी और एक कदम पर तमंचा पड़ा हुआ था।
वारदात के बाद पुलिस को भाई योगेंद्र सिंह ने सुरेश गुप्ता और उनके दो बेटों अंकित और गौरव को नामजद करते हुए तहरीर दी। सुरेश गुप्ता का नाम सामने आते ही पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। कचहरी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे पुलिस ने चेक कराए तो पता चला कि सुरेश गुप्ता सुबह 10:08 बजे कचहरी में घुसा। इसके बाद 11:36 बजे वह एसीजेएम कार्यालय की सीढ़ियां चढ़ते हुए सीसीटीवी कैमरे में नजर आया। उसकी कमीज पर खून के धब्बे भी मिले और गोली चलाने से बने ब्लैकनिंग के निशान भी थे। वारदात की सूचना पाकर आईजी बरेली रेंज रमित शर्मा पुलिस लाइन पहुंच गए थे। आईजी, एसपी एस. आनंद के सामने सुरेश गुप्ता ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
आरोपी सुरेश गुप्ता ने बताया कि पिछले 20 साल से भूपेंद्र सिंह ने उसे परेशान कर रखा था। चोरी डकैती हत्या के प्रयास समेत 24 मुकदमे दर्ज करा दिए थे। केस खारिज हो जाने पर बार-बार रिवीजन डाल देते थे। 153 शिकायतें अब तक विभिन्न स्तर पर भूपेंद्र सिंह ने कर रखीं थीं। इन सब वजहों से उनकी हत्या कर दी। तमंचा वह अपनी जेब में रखकर ले गया था। कचहरी में वकीलों की चेकिंग कम होती है, इसलिए उसे किसी ने टोका नहीं।
भूपेंद्र सिंह के रोज कचहरी में आने के कारण उसे हत्या के लिए यही जगह मुफीद लगी। भूपेंद्र सिंह को उसने एसीजेएम दफ्तर की ओर जाते देखा तो पीछे-पीछे वह भी चला गया। वहां पर घुसते ही भूपेंद्र सिंह खड़े दिखाई दिए। बगैर कोई बात किए उसने तमंचे से भूपेंद्र की कनपटी के पास गोली मार दी। भूपेंद्र सीधा उनके ऊपर गिरे। इसके बाद वह वहां से बगैर किसी को नजर आए निकल गया।
भाई का था तमंचा, एक ही था कारतूस
मुकदमेबाजी के जाल में फंसे सुरेश गुप्ता काफी पहले से भूपेंद्र सिंह को रास्ते से हटाने के बारे में सोच रहा था। उनके एक भाई की मृत्यु हो गई थी। वारदात में प्रयुक्त तमंचा उसके पास था। पुलिस से सुरेश गुप्ता ने बताया कि उसके भाई का 32 बोर का तमंचा घर पर रखा हुआ था। इसी को लेकर वह हत्या करने पहुंच गया। उसके पास एक ही कारतूस था।
किरायेदारी के विवाद से शुरू हुई रंजिश
भूपेंद्र सिंह वकालत करने से पहले ट्यूशन पढ़ाते थे। इस दौरान भूपेंद्र सिंह 1998 में सुरेश गुप्ता के मकान में रहने लगे थे। सुरेश गुप्ता पहले स्टेट बैंक आफ इंडिया में क्लर्क था। भूपेंद्र सिंह सुरेश गुप्ता के बच्चों को भी ट्यूशन पढ़ाते थे। इसी मकान में भूपेंद्र सिंह अपनी कोचिंग चलाने लगे थे। इसके बाद सुरेश गुप्ता और भूपेंद्र सिंह के बीच किरायेदारी को लेकर विवाद हो गया।
बताया जाता है कि सुरेश गुप्ता ने पुलिस की मदद से भूपेंद्र सिंह को अपने मकान से निकाल दिया था। यहीं से सुरेश गुप्ता और भूपेंद्र सिंह के बीच रंजिश शुरू हो गई। एक-दूसरे पर दोनों लोगों ने कई मुकदमे दर्ज करा रखे थे। भाई योगेंद्र ने बताया कि पांच साल पहले ईदगाह रोड पर सुरेश गुप्ता ने भूपेंद्र पर हमला कराया था। बाइक सवार हमलावरों ने भूपेंद्र पर क्रिकेट बैट से हमला किया था लेकिन वह बच गए थे।
पहले भी हो चुके कचहरी परिसर में हमले
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनंत कुमार सिंह ने बताया कि कचहरी परिसर में हमला होना बहुत गंभीर बात है। कचहरी परिसर में इससे पहले भी कई हमले हो चुके हैं। 22 साल पहले कोर्ट में एक गवाह को गोली मार दी गई थी। हत्यारोपी को मौके से ही पकड़ लिया गया था। कुछ साल बाद शातिर अपराधी पीचू खां की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद वकील संजय सक्सेना के ऊपर जानलेवा हमला किया गया था।
इसमें आरोपी चाचा को सजा हो गई थी। कचहरी परिसर में एक वकील के तख्त पर एक पक्षकार को गोली मारी गई थी। कचहरी में एक महिला ने दूसरी महिला को चाकू मार दिया था। जिसमें उसकी मौत हो गई थी। अनंत कुमार सिंह ने कहा कि कचहरी में जज, वकीलों और वादकारियों की सुरक्षा का पूरा इंतजाम पुलिस को करना चाहिए।