शाहजहांपुर। जिले में कभी मुख्य विपक्षी दल माने जाने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का जनाधार एक दशक में बहुत तेजी से गिरा है। बृहस्पतिवार को आए विधानसभा चुनाव के परिणाम में छह विधानसभा सीटों पर बसपा को कुल मिलाकर एक लाख वोट नहीं मिल सके। पूरी पार्टी 90, 437 वोट ही पा सकी।
2022 के विधानसभा चुनाव में तो पार्टी का प्रदर्शन बहुत ज्यादा खराब रहा। प्रत्याशी के जातीय और बसपा के कैडर वोट के आधार पर माना जा रहा था कि पार्टी मुकाबला करेगी लेकिन, ऐसा कहीं दिखा नहीं। सभी सीटों पर वोटों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। नगर सीट से सर्वेश चंद्र मिश्रा धांधू को केवल 8561 वोट मिले। सबसे ज्यादा वोट 21636 ददरौल में चंद्रकेतु मौर्य को मिले। जलालाबाद से अनिरुद्ध सिंह यादव को 16003, पुवायां से उदयवीर सिंह को 16766, कटरा से राजेश कश्यप को 15214, तिलहर से नवाब फैजान अली खां को 12257 वोट मिले।
2012 में मुख्य विपक्षी दल थी बसपा
2012 में बसपा को सवा तीन लाख से ज्यादा वोट मिला था। जलालाबाद से नीरज मौर्य और तिलहर से रोशनलाल वर्मा ने बसपा के टिकट से जीत हासिल की थी। पुवायां, ददरौल और कटरा सीट पर बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे। नगर सीट पर बसपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहा था। सबसे कम वोट नगर सीट पर ही मिले थे।
2017 में भी कहीं दूसरे स्थान पर नहीं रही पार्टी
2017 के चुनाव में मोदी की लहर में भाजपा ने जिले की छह में से पांच सीटों पर कब्जा किया था। तब बसपा प्रत्याशी कहीं भी दूसरे नंबर पर भी नहीं आ सका था। तब भी पार्टी का वोट लगभग एक लाख नीचे गिरा था। पार्टी के सभी प्रत्याशियों को मिलाकर 2,43, 331 वोट मिले थे। जलालाबाद और ददरौल में बसपा प्रत्याशियों को 50 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। नगर सीट से मोहम्मद असलम खान को 16546, कटरा से राजीव कश्यप को 47471 तिलहर से अवधेश कुमार वर्मा को 31418 और पुवायां से गुरुवचन लाल को 38797 वोट मिले थे। बसपा के प्रत्याशी जीते भले न हों लेकिन प्रदर्शन बहुत खराब नहीं रहा था।
बसपा के प्रत्याशियों को पार्टी का बेस वोट बैंक मिला है। कैडर वोट ही प्रत्याशियों को मिल सका। प्रत्याशियों के अपने वोट उन्हें नहीं मिल सकें। इसके चलते पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। पार्टी की हार के कारण की समीक्षा होगी। - राजेश्वर सिंह, मुख्य सेक्टर प्रभारी, बसपा