शाहजहांपुर। जनपद में पराली जलने की अब तक 70 घटनाओं की सेटेलाइट के माध्यम से जानकारी मिली है। इसमें पराली जलाने वाले कृषकों पर 1.40 लाख से अधिक जुर्माना लगाया गया है। कृषकों से नियमानुसार वसूली की कार्रवाई किए जाने के साथ गन्ने का सट्टा निरस्त करने और लेवी पर धान क्रय से प्रतिबंधित किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।
डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि फसल अवशेष (पराली) को न जलाएं। पराली जलाने से वायु प्रदूषण में अत्यधिक वृद्धि होती है। जिससे जनस्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है और मिट्टी की उर्वरता घटती है।
कृषि विभाग की ओर से पराली प्रबंधन के लिए यंत्रों पर सब्सिडी, कस्टम हायरिंग सेंटर एवं फसल अवशेष प्रबंधन योजनाओं के माध्यम से सभी किसानों को वैकल्पिक समाधान उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों को इन सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए।
29 नवंबर तक कृषि यंत्रों की बुकिंग करने पर अनुदान दिया जाएगा। कृषक पराली को पराली को एकत्र कर बीडीओ के माध्यम से गोशालाओं को दे सकते हैं। हर किसान का सहयोग जनहित में आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पराली जलाए जाने पर कृषकों से 30,000 रुपये तक जुर्माना की वसूली पर्यावरण क्षति के लिए की जाएगी। सोमवार को दस किसानों को जेल भेजने समेत 26 के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
किसानों को मिली जमानत
शाहजहांपुर। पराली जलाने पर सोमवार को प्रशासन ने सदर व तिलहर तहसील के दस किसानों को पकड़कर जेल भिजवा दिया था। मंगलवार को सभी किसानों को एसडीएम कोर्ट से जमानत दे दी गई। एसडीएम तिलहर रविंद्र कुमार ने बताया कि सभी किसानों को कोर्ट से जमानत दे दी गई है। संवाद