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'सीबीआई एसपी ने नहीं होने दी नूपुर की गिरफ्तारी'

Thu, 25 Apr 2013 12:05 AM IST
गाजियाबाद/ब्यूरो
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‘मैं नूपुर तलवार को गिरफ्तार करना चाहता था, मगर मेरे सीनियर अफसर एसपी नीलाभ किशोर ने मुझे इसकी अनुमति नहीं दी।’
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आरुषि-हेमराज मर्डर केस के मुख्य जांच अधिकारी रहे एएसपी एजीएल कौल ने डिफेंस की जिरह के दौरान एक सवाल के जवाब में यह बात कही। बुधवार को एएसपी कौल से जिरह पूरी हो गई।

सीबीआई लोक अभियोजक बीके सिंह कार्यवाही के दौरान कोर्ट में मौजूद रहे।

डिफेंस के अधिवक्ताओं सत्यकेतु सिंह, तनवीर अहमद मीर और मनोज शिशौदिया ने गवाह से जिरह पूरी की। मामले की अगली सुनवाई अब 26 अप्रैल को होगी।

इससे पहले दोहरे हत्याकांड के आरोपी तलवार दंपति कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई कोर्ट में पेश हुए।

गवाह एजीएल कौल ने बताया कि विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्य और सामान के आधार पर ही नूपुर तलवार को गिरफ्तार किया जा सकता था।

मैं नूपुर को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ करना चाहता था, लेकिन सीनियर अफसर की अनुमति न मिलने से ऐसा नहीं हो सका।

यह कहना सही है कि अंतिम रिपोर्ट में मैंने नूपुर तलवार का नाम अभियुक्त के कॉलम में नहीं दिखाया है, मगर अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि अपराध दोनों अभियुक्तों ने मिलकर किया।
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गवाह ने यह भी बताया कि अभियुक्तों ने ई-मेल भेजकर कहा कि जो साक्ष्य मौके से सीज किए गए हैं उनका एलसीएन (लो काउंट नंबर) डीएनए टेस्ट कराया जाए।

इसके बावजूद यह परीक्षण नहीं कराए गए, क्योंकि सीडीएफडी हैदराबाद और सीसीएमबी हैदराबाद से मैंने पता किया था तो उन्होंने बताया कि चूंकि इन सीज सामानों का डीएनए परीक्षण हो चुका है, इसलिए उनका एलसीएन डीएनए परीक्षण नहीं हो सकता।

डा. राजेश तलवार ने इसके लिए विदेश के एक विशेषज्ञ का विवरण दिया था, जहां उनके मुताबिक ये परीक्षण हो सकते थे।

तब मैंने उस विशेषज्ञ के अलावा विदेश के 4-5 अन्य विशेषज्ञों से संपर्क किया तो केवल उसी विशेषज्ञ ने परीक्षण करने को सहमति दी, जिसका नाम राजेश तलवार ने बताया था।

अन्य विशेषज्ञों ने परीक्षण करने से मना कर दिया था।

एजीएल कौल ने यह भी बताया कि मैंने इस विशेषज्ञ के बारे में इंटरपोल की मदद ली तो मालूम हुआ कि उसके पास अधिकृत लैब नहीं है। मुझे यह भी मालूम पड़ा था कि उक्त विशेषज्ञ डा. राजेश तलवार के पहले से ही संपर्क में था।

गवाह ने यह भी बताया कि एसीएन डीएनए टेस्ट भारत में नहीं किया जाता, क्योंकि यह मान्यता प्राप्त नहीं है। गवाह ने यह भी कहा कि अभियुक्त मुझे जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, बल्कि जांच से भटका रहे थे।
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एकत्र साक्ष्य और सामान के आधार पर यह कहना भी गलत है कि 16 मई 2008 को हेमराज के दोस्त कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल फ्लैट के अंदर आए और उन्हीं के हाथों दोनों कत्ल हुए हों।
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