उत्तरप्रदेश के चंदौली का एक विद्यालय मिसाल बन गया है। सिर पर केसरिया साफा बांधे और माथे पर चंदन का टीका लगाए सस्वर रामचरित मानस, हनुमान चालीसा और हदीस जब स्कूल के बच्चे एक साथ पढ़ते हैं तो माहौल में सौहार्द की सुगंध महकने लगती है।
देवरहा बाबा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मिल्कीपुर में पिछले कई सालों से किताबी तालीम के साथ साथ बच्चों को आपसी भाईचारे का भी पाठ पढाया जा रहा है। यहां पढ़ने वाले हिंदू-मुस्लिम परिवारों के बच्चे मंगलवार को हनुमान चालीसा, शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करते हैं तो शुक्रवार को हदीस पढ़ते हैं।
चंदौली, मिर्जापुर और वाराणसी के बार्डर पर स्थित क्षेत्र के मिल्कीपुर स्थित देवरहा बाबा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 575 विद्यार्थी हैं। इसमें लड़कों के साथ-साथ लड़कियों की संख्या भी खासी है।
वैसे तो 80 प्रतिशत बच्चे हिंदू हैं, लेकिन यहां के भाईचारे की खुशबू पिछले कई सालों से पूरे इलाके में बिखर रही है। इस स्कूल में गरीब और यतीम परिवारों के ऐसे बच्चे भी मुफ्त तालीम ले रहे हैं जिनके सिर से मां-बाप का साया उठ चुका है।
स्कूल में प्रबंधन की तरफ से इन बच्चों को मुफ्त ड्रेस, भोजन और किताबें व कापियां उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकारी स्तर से इस स्कूल को कोई अनुदान नहीं मिलता है।
विद्यालय में पाकड़ के विशाल वृक्ष के नीचे जब स्कूल की छात्रा फातिमा, रुखसाना, नाजनीन, रूमा, नजमत अपनी सहेलियों के साथ शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करती हैं तो पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत हो जाता है। माथे पर टीका लगाए ये छात्राएं पूरे भाव के साथ जब पाठ करती हैं तो अलग समा बंध जाता है। इसी तरह प्रत्येक शुक्रवार को विद्यालय की छात्राएं रानी, संतोषी, संगीता, अनीता अपने सहेलियों के साथ हदीस पढ़ती हैं। जिन्हें सभी बच्चे पूरे मनोभाव से सुनते हैं।
कई परिवारों ने छोड़ दी मांस-मदिरा
देवरहा बाबा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मछुआरा परिवार के बच्चे अधिक पढ़ते हैं। इन बच्चों के अंदर अंकुरित हो रहे संस्कार का असर है कि कई परिवार के लोगों ने मांस व मदिरा का सेवन करना छोड़ दिया है। स्कूल प्रशासन का भी कहना है कि संस्कारित शिक्षा के चलते बच्चों के ऊपर सार्थक प्रभाव पड़ता है जिसे देख उनके परिवार के भी लोग नशा छोड़ रहे हैं।
देवरहा बाबा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविंद सिंह का कहना है कि यह विद्यालय सर्वधर्म समभाव की भावना से बच्चों को शिक्षा देता है। कोई सरकारी मदद नहीं मिलने के बाद भी बाबा के शिष्यों के सहयोग से बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है। इस विद्यालय में सभी धर्म और जाति के बच्चे पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार को सुंदरकांड, मंगलवार को हनुमान चालीसा, शुक्रवार को हदीस बच्चे और बच्चियां पढ़ती हैं।