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तांगे में बोरा ओढ़ाकर नेहरू की बचाई जान, परिवार रोटी के लिए परेशान

Wed, 14 Aug 2013 12:33 AM IST
नईमुर्रहमान/महोबा
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ब्रिटिश हुकूमत में पं. जवाहर लाल नेहरू की जान बचाने वाले पीरू तांगे वाले के परिवार के सामने रोजी रोटी के लाले हैं। इतना ही नहीं पीरू तांगे वाले के परिवार को आज तक न तो कोई पेंशन दी गई और न ही कोई सुविधाएं।
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महज स्वतंत्रता दिवस पर इस स्वतंत्रता सेनानी के मकान को बिजली से रोशन कर दिया जाता है।

वर्ष 1932 में उत्तर प्रदेश के महोबा रेलवे स्टेशन पर उतरे पं. जवाहर लाल नेहरू को शहर तक लाने के लिए कोई भी तांगे वाला राजी नहीं हुआ। कारण, अंग्रेज सिपाहियों की जबर्दस्त नाकेबंदी और चेकिंग से तांगा चालक डर गए थे और उन्हें शहर तक लाने से मना कर दिया।

तभी पीरू तांगे वाले ने अंग्रेजी सैनिकों की परवाह किए बिना उन्हें तांगे में लिटा दिया और ऊपर से बोरे ओढ़ा दिए। चेकिंग के दौरान सिपाहियों से मरीज बताकर अस्पताल ले जाने की बात कहकर उन्हें शहर तक लाया गया।
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उन दिनों स्वतंत्रता सेनानी रज्जब अली आजाद भी घर से गायब चल रहे थे। पं. जवाहर लाल नेहरू जब रज्जब अली आजाद के घर पहुंचे तो वह घर पर नहीं थे। रात का वक्त होने के कारण नेहरू जी परेशान हो गए। कहां जाएं?

तभी पीरू तांगे वाले ने उन्हें अपनी कुटिया में रात को ठहराया जहां पर नेहरू जी ने ज्वार की रोटी और टमाटर की चटनी खाकर रात गुजारी।

अगले दिन इसी कुटिया में पं. जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में स्वतंत्रता सेनानियों की बैठक हुई। जहां पर आंदोलन की रणनीति बनाई गई। इसके बाद रज्जब अली आजाद, उमादत्त शुक्ला, सदानंद पांडेय, मुंशी मंटीलाल सहित तमाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी झंडे, डंडे लेकर निकल पड़े और आंदोलन ने जोर पकड़ लिया।

लेकिन आंदोलन को गति दिलाने आए पं. जवाहर लाल नेहरू की जान बचाने वाले पीरू तांगे वाले के परिवार का आज कोई पुरसाहाल नहीं है।

जबकि पं. जवाहर लाल नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखा है, मै आभारी हूं महोबा के पीरू तांगे वाले का, जिसने अपनी जान पर खेलकर मेरी जान बचाई।

सन् 1967 में प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने पीरू तांगे वाले के परिजनों को 80 हजार रुपये की चेक भेजी लेकिन इसके बाद से इस स्वतंत्रता सेनानी के परिवार की किसी ने सुधि नहीं ली।

अलबत्ता 2008 में तत्कालीन डीएम अनीता चटर्जी और एसपी ज्ञान सिंह ने उनके पौत्र मोहम्मद इस्माइल को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया था।

सेनानी के परिवार को भूल गई सरकार
पीरू तांगे वाले के पौत्र मोहम्मद इस्माइल बताते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उमादत्त शुक्ला ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को कई बार पत्र लिखकर पीरू के परिजनों की आर्थिक मदद की सिफारिश की लेकिन आज तक कोई मदद नहीं मिली। उनका परिवार आज भी तंगहाली से गुजर रहा है।

कोई नहीं ले रहा स्वतंत्रता सेनानियों की सुध
स्वतंत्रता सेनानी वासुदेव चौरसिया कहते हैं कि जान की बाजी लगाकर देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। आज भी वह अपने हाल में जी रहे हैं। न ही स्वतंत्रता सेनानियों को कोई सुविधाएं मिल रही हैं। अधिकारी अफसरशाही में मस्त हैं। न उन्हें सेनानियों के स्मारकों की सुध है और न स्वतंत्रता सेनानियों के स्मारक बनाए जा रहे हैं।
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