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भगौसा में बनेगा वृहद गो संरक्षण केंद्र

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भगौसा में बनेगा वृहद गो संरक्षण केंद्र
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शासन ने 1.2 करोड़ रिलीज किया, कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी कराएगा निर्माण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। बेलहर क्षेत्र के किसानों को छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात मिलेगी। इसके लिए भगौसा में वृहद गो संरक्षण केंद्र बनाया जाएगा। शासन ने इसके लिए 1.2 करोड़ रुपये अवम़ुक्त कर दिया है। कार्यदायी संस्था पीडब्लूडी निमार्ण कार्य कराएगी। विभाग की ओर से निर्माण कार्य शुरू कराए जाने के लिए कार्यदायी संस्था को पत्र भेजा गया है।
बेलहर क्षेत्र के भगौसा में नया गो संरक्षण केंद्र बनाए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। डीएम ने इसके लिए पहल की और शासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी। एक हेक्टेयर जमीन इसके लिए चिह्नित है। इस गो संरक्षण केंद्र में 150 पशुओं को रखने की क्षमता होगी। चार शेड बनाए जाएंगे। पशुओं की चरनी, नाद, पीने के पानी के लिए पंप लगाया जाएगा। चारे की भी व्यवस्था की जाएगी। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्र ने बताया कि 1.2 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए हैं। निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य शुरू कराए जाने के लिए पत्राचार किया गया है। इसके बन जाने निश्चित ही छुट्टा पशुओं से किसानों को राहत मिलेगी।
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कोल्ड रूम बनकर तैयार
जिला मुख्यालय पर पशु चिकित्सालय में टीका भंडारण के लिए कोल्ड रूम बनकर तैयार हो गया है। इसकी क्षमता पांच लाख टीका रखने की होगी। अब तक सिर्फ तीन लाख टीका भंडारण की व्यवस्था थी। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्र ने बताया कि कोल्ड रूम बनकर तैयार हो चुका है। पशुओं को टीका लगाने से पूर्व 100 नमूना मथुरा बैरानिटी प्रयोगशाला भेजा गया है। खुरपका, मुंहपका का टीका सवा लाख बड़े पशुओं को, डेढ़ लाख बकरियों को और 3000 भेड़ को लगाने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके साथ ही डेढ़ लाख छोटे पशुओं को टैंक किया जाएगा।
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नैपियर घास लगाकर दूर की जाएंगी चारे की समस्या
जिले के वृहद गो संरक्षण केंद्र जिगिना और मझौरा की खाली पड़ी जमीन में नैपियर घास लगाई जाएगी। भारतीय चारा अनुसंधान केंद्र झांसी से नैपियर घास की रूट मंगाई जाएगी। एक बार नैपियर घास के रूट को लगा देने से कम से कम पांच साल तक चारे की समस्या नहीं होगी। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्र ने बताया कि मनरेगा योजना से नैपियर घास लगाए जाने का प्रस्ताव है। दस हजार रूट मंगाई जाएगी। झांसी अनुसंधान केंद्र के डायरेक्टर से वार्ता हो चुकी है। जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था से गो संरक्षण केंद्र में रहने वाले पशुओं को चारे की समस्या नहीं होगी।
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