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टीटीएसपी योजना पर भ्रष्टाचार का ‘साया’

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टीटीएसपी योजना पर भ्रष्टाचार का ‘साया’
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केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की टीम की रिपोर्ट पर शुरू हुई जांच
वर्ष 2012 में जिले के 408 गांवों के लिए स्वीकृत हुई थी टीटीएसपी योजना
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। इंसेफेलाइटिस व अन्य जलजनित बीमारियों पर प्रभावी रोकथाम के लिए वर्ष 2012 में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए टीटीएसपी (टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट) योजना लागू हुई थी। इसके तहत जिले में बनी अधिकांश टीटीएसपी की गुणवत्ता बेहद खराब थी। कुछ तो उद्घाटन से पहले ही बेकार हो गईं और अधिकांश उद्घाटन के कुछ दिन बाद। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की एक टीम 2018 के अंत में आई थी। टीम को जांच कई प्रकार की खामियां मिलीं। शासन के निर्देश पर अब इसकी जांच शुरू हुई है।
दरअसल, संतकबीनगर जिला जेई और एईएस प्रभावित है। ऐसे में लोगों शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2012 में जिले के 408 गांवों के लिए टीटीएसपी योजना बनाई गई। इसके तहत स्टैंड पोस्ट बनाए जाने थे। प्रत्येक पोस्ट के लिए 2.80 लाख आवंटित हुए। बजट मिलने के बाद साल भर में ही अधिकांश जगह निर्माण भी हो गया। निर्माण के करीब पांच साल बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की टीम ने जब स्टैंड पोस्टों का निरीक्षण किया तो कार्यों हकीकत सामने आ गई। टीम ने प्रदेश सरकार को दी गई रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया कि जिले में बनी अधिकांश टीटीएसपी मानक विहीन हैं। कहीं ट्यूबवेल खराब हैं तो कहीं निर्माण कार्य ही अपूर्ण है। इसके बाद भी सभी के बजट का पूर्ण रूप से भुगतान किया जा चुका है। रिपोर्ट के आधार पर अब शासन के निर्देश पर जल निगम ने जांच शुरू की है।
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क्या है टीटीएसपी
टीटीएसपी अर्थात टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट। गांव में सार्वजनिक स्थल पर जमीन पर ही एक छोटी टंकी का निर्माण कराया गया जिसमें चार नल (टोंटी) लगाए गए। पानी भरने के लिए 250 फिट गहरा बोरिंग किया गया और पानी भरने के लिए एक हार्स पॉवर का एक मोटर लगाई गई। उद्देश्य यह था कि गहराई से निकाले गए इस पानी को टंकी में संचित किया जाएगा जिसमें से लोग टोंटी के जरिए अपनी जरूरत के अनुसार बर्तन में भरकर अपने घर ले जाएंगे।
125 टीटीएसपी है संदेह के घेरे में
जिले में योजना के तहत कुल 408 टीटीएसपी का निर्माण कराया जाना था। जांच में पौली और सेमरियांवा ब्लॉक समेत करीब 80 गांवों की टीटीएसपी अपूर्ण पाई गई। कहीं बोरिंग नहीं हुआ था तो कहीं मोटर ही नहीं लगी। कई जगह बिना चालू किए ही निर्माण पूर्ण बताया गया था। केंद्रीय टीम ने यह भी आशंका जताई थी कि निर्माण की वास्तविक संख्या कम हो सकती है। टीम ने 125 टीटीएसपी को संदेह के घेरे में लिया था।
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टीटीएसपी योजना की जांच जल निगम मुख्यालय के निर्देश पर हो रही है। जांच टीम ने इस परियोजना से संबंधित जो भी अभिलेख मांगे हैं वह उपलब्ध कराया जा चुका है। जिले में बनी सभी टीटीएसपी का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
- वीपी सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम
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