संतकबीरनगर। मोबाइल और लैपटॉप के बढ़ते चलन का सबसे ज्यादा असर छात्र छात्राओं पर देखा जा रहा है। 14 से 18 साल तक के विद्यार्थी दिन भर सोशल मीडिया पर निगाहें लगाए रहते हैं। ऐसे में उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। साथ ही उसके मन मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ रहा है। इसको देखते हुए अब शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित होने के बाद शिक्षक बच्चों को मोबाइल लैपटॉप से दूर रहने के उपाय बताएंगे।
माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को जल्द ही प्रशिक्षित किया जाएगा। मनोविज्ञान शाला की ओर से एक पुस्तक भी तैयार की जा रही है। शिक्षक कक्षाओं में विभिन्न के माध्यम से बच्चों को रचनात्मकता की ओर प्रेरित करेंगे। ‘’आओ किताब पढ़ें’’ मुहिम के तहत शिक्षक छात्र-छात्राओं को लाइब्रेरी में ले जाएंगे। मनोविज्ञानशाला की ओर से दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग तरीकों से शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। छात्र-छात्राओं को किस तरह से मोबाइल फोन से दूर रखना है, इसको लेकर तरह-तरह की एक्टिविटी भी कराई जाएंगी।
शिक्षक विद्यार्थियों को स्कूल के मैदान का भ्रमण कराएंगे, ताकि वह प्रकृति से निकटता महसूस कर सकें। साथ ही पौधों की देखरेख का जिम्मा भी सौंपेंगे। बच्चों के अंदर एकाग्रता का विकास हो, इसके लिए शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर कैंची, गोंद, कागज, सुतली, दपती और रंग के नाम लिखकर विद्यार्थियों की आंख बंद करके मन को एकाग्र होकर सवाल-जवाब करेंगे।
वहीं लत को छुड़ाने के लिए आओ किताब पढ़े मुहिम के तहत शिक्षक छात्र-छात्राओं को लाइब्रेरी में ले जाएंगे। जहां पर बच्चों को पढ़ाने के बाद अगले दिन पढ़े हुए लेख या कहानी को सुनाने को कहेंगे। शिक्षक समय के सदुपयोग के बारे में भी जानकारी देंगे। डीआईओएस हरिशचंद नाथ ने बताया कि इस योजना से बच्चों को किताबों की लत लगेगी।