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बारिश ने बढ़ाई गलन, कीचड़ से सराबोर हुईं सड़कें

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खलीलाबाद में बारिश से सड़क पर रहा सन्नाटा। - फोटो : KHALILABAD
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बारिश ने बढ़ाई गलन, कीचड़ से सनीं सड़कें
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संतकबीरनगर। शुक्रवार की भोर से मौसम का मिजाज बदल गया और बारिश शुरू हो गई। पूरे दिन बारिश होती रही। इससे गलन भी बढ़ गई। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। सरकारी दफ्तरों में इक्का-दुक्का फरियादी दिखाई दिए। रोज जहां लोग हॉफ जैकेट में दिखाई देते थे, वहीं फुल जैकेट पहनना शुरू कर दिया। शहर से लेकर गांवों तक सड़कें कीचड़ से सराबोर हो गईं। बारिश ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी।
खलीलाबाद शहर के बरदहिया बाजार और डीघा में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे खराब स्थिति को गांवों में हुई। धनघटा-खलीलाबाद मार्ग, मेंहदावल-खलीलाबाद मार्ग पर कीचड़ पसर गया। फिसलन का भी खतरा भी बढ़ गया है। बारिश की वजह से पुलिस कार्यालय, कलेक्ट्रेट, विकास भवन, बीएसए कार्यालय, डीआईओएस कार्यालय समेत अन्य जगहों पर सन्नाटे का आलम था। जिन लोगों का घर से निकलना जरूरी था, वे लोग रेनकोट पहन कर या फिर छाता लेकर बाहर निकले। बारिश से बचने के लिए मेंहदावल बाईपास पुल के नीचे लोगों की भीड़ जुट गई। वाहनों की कतार लग जाने से यातायात पुलिस कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बारिश नहीं थमने से सबसे अधिक चितिंत किसान दिखाई दिए। किसान बृजभूषण पांडेय ने बताया कि यह बारिश किसानों के लिए बेहद नुकसानदायी है। 30 प्रतिशत किसान जहां इस बारिश से लाभान्वित होंगे, वहीं 70 प्रतिशत किसानों के लिए नुकसान दायक है। दलहन और तिलहन की फसलों के लिए यह बारिश नुकसानदायक है। किसान अतुल पांडेय, अकुंर, हरिश्चंद्र चौधरी, दिग्विजय पासवान, धीरज पांडेय, डॉ. सच्चिदानंद, मिंटू आदि ने बताया कि जिन किसानों ने गेहूं की बुुआई कर अभी पहली सिंचाई नहीं की थी, उनकी फसल के लिए तो बारिश लाभदायी है, लेकिन जिन्होंने से पहली सिंचाई कर दी थी और जो लोग अभी गेहूं की बुआई नहीं की है, उनके समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई है। खास कर आलू और सरसों की फसलों के लिए यह बारिश काफी हानिकारक साबित होगी।
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15 से 20 नवंबर के बीच जिन किसानों ने गेहूं की बुआई कर दी, उनकी फसलों के लिए यह बारिश अमृत के समान है, लेकिन जिन लोगों ने अभी बुआई नहीं की है, उनके समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई। उनकी बुआई पिछड़ जाएगी। आलू की फसलों में यदि पानी जमा हो जाएगा तो नुकसान पहुंचेगा। बारिश सरसों की फसल के लिए भी थोड़ा नुकसानदायक होगा। जिले में 93 हजार हेक्टेयर में गेहूं और 1200 हेक्टेयर में आलू की खेती हुई है।
पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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