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जंगलऊन गांव में 25 साल से चली रही चकबंदी, लेकिन अब तक पूरी नहीं

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जंगलऊन गांव में 25 साल से चल रही चकबंदी
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संतकबीरनगर। जिले में चकबंदी की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। जंगलऊन गांव में 25 वर्षों से चकबंदी चल रही है। मोहम्मदपुर कठार और जंगल बेलहर में भी ऐसा ही हाल है। अब जिम्मेदार दलील दे रहे हैं कि पहले के अधिकारियों की टीम ने ध्यान नहीं दिया। आधारभूत गलतियों में समय से सुधार नहीं हो पाया। अब छह गांवों को लक्ष्य कर प्रक्रिया पूूर्ण करने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। 12 गांवों में चक निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
जिले के तीनों तहसीलों के 79 गांव चकबंदी की प्रक्रिया में है। इसमें दस गांव काफी पुराने हैं और शेष गांव नए शामिल किए गए हैं। वर्तमान में 29 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें जंगलऊन गांव भी शामिल है। यहां 25 वर्ष से चकबंदी चल रही है। इसके पीछे जो वजह बताई जा रही है, उसमें जंगल, झांडी पोखरा, तालाब, झील आदि नंबरों में खातेदारों के इंद्राज हैं। करीब 85 हेक्टेयर जमीन ग्रामसभा की है। इसमें जंगल भी प्रभावित है। वैसे 35 हेक्टेयर जमीन को चकबंदी प्रक्रिया के तहत ग्रामसभा को लौटा दी गई है। शेष जमीनों में विधिक अड़चनों की वजह से पेच फंसा हुआ है। इसी तरह मोहम्मदपुर कठार गांव में करीब 14 साल से चकबंदी चल रही है। करीब नौ साल से जंगल बेलहर में चकबंदी चल रही है। यहां भी जंगल की जमीन का विवाद है। चकबंदी प्रक्रिया पूरी न होने से किसानों को परेशानी हो रही है।
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‘पूर्व की अधिकारियों की टीम ने ध्यान नहीं दिया’
जिला बंदोबस्त अधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि पांच वर्ष में किसी भी गांव की चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने का नियम है, लेकिन अधिक समय से चकबंदी प्रक्रिया में कई गांवों के होने के पीछे वजह है कि पूर्व की अधिकारियों की टीम ने ध्यान नहीं दिया। जो भी आधारभूत गलतियां थी, उसमें सुधार की दिशा में सुस्ती बरती गई। छह गांवों में धारा 52 का लक्ष्य रखा गया है। इसमें चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर रिकॉर्ड तहसीलों में भिजवाया जाएगा। जिन गांवों में चकबंदी पूर्ण करने का लक्ष्य है उसमें लौकी मिश्र, सेमरी, चंदनी, जंगलऊन, अलाईचक और बगही गांव शामिल है। 12 गांवों में चक निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। वैसे विभाग में स्टॉफ की कमी भी है, लेकिन लक्ष्य को हर हाल में पूरा किया जाएगा।
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तीन दिन पहले ही चकबंदी विभाग के कार्यों की समीक्षा की थी। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और सहायक चकबंदी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो भी प्रक्रिया में पुराने गांव हैं, उनमें जल्द ही प्रक्रिया पूर्ण कर रिकॉर्ड तहसील मुख्यालयों पर भिजवाएं। जहां कहीं विधिक अड़चन है, उसे दूर करने की कोशिश करें। चकबंदी की प्रक्रिया में तेजी लाए जाने की दिशा में पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
रवीश गुप्त, डीएम
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