फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: बंदी की मौत का रहस्य गहराया, जांच जारी

विज्ञापन
विज्ञापन
संतकबीरनगर। जिला कारागार में निरुद्ध बंदी टुनटुन की मौत के दस दिन बाद भी उसके सिर में लगी चोट का रहस्य नहीं सुलझ सका है। गिरफ्तारी से लेकर जेल में दाखिले और जिला अस्पताल पहुंचने तक के मेडिकल रिकॉर्ड, कर्मचारियों के बयान और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज का मिलान किया जा रहा है। इस बीच, घटना के समय जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक और जिला कारागार प्रशासन के बीच पूर्व में चल रही तनातनी का मामला भी चर्चा में है। कार्रवाई लंबी खिंचने से बंदी की मौत रहस्य गहराता जा रहा है और मामले को लेकर कई प्रकार के सवाल खड़े हो रहे हैं।
विज्ञापन

हालांकि, बंदी की मौत और चिकित्सक-जेल प्रशासन के बीच विवाद के संबंध में अभी तक किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा।

धर्मसिंहवा क्षेत्र के अमरहां गांव निवासी टुनटुन को मेंहदावल पुलिस ने 21 सितंबर को चोरी के मामलों में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसके स्वजन ने पुलिस पर पिटाई कर चोट पहुंचाने का आरोप लगाया था। दूसरी ओर, गिरफ्तारी के बाद मेंहदावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराई गई मेडिकल जांच और जिला कारागार में दाखिले के समय की जांच में चोट के निशान नहीं मिलने की बात सामने आई थी।
विज्ञापन

इसके बाद 28 सितंबर की रात उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर की चोट का उल्लेख होने से शुरुआती मेडिकल जांच और मौत से पहले की परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
बंदी की मौत के मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि उसके सिर में चोट कब और किन परिस्थितियों में लगी। परिजन की ओर से पुलिस पर पिटाई का आरोप लगाए जाने के बाद गिरफ्तारी के समय की मेडिकल जांच महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं, जेल में दाखिले के दौरान चोट के निशान नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट को मृत्यु से पहले का बताए जाने के बाद जांच टीम संबंधित अभिलेखों की पड़ताल कर रही है।
टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तारी के समय, जेल में प्रवेश के दौरान और कारागार में रहने की अवधि में बंदी की शारीरिक स्थिति कैसी थी। मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों, संबंधित कर्मचारियों के बयानों और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज का मिलान कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही चोट लगने के समय और परिस्थितियों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल भेजा गया था बंदी
जेल प्रशासन के अनुसार, 28 सितंबर की रात करीब 9:40 बजे टुनटुन ने सांस लेने में परेशानी और सीने में हल्के दर्द की शिकायत की थी। कारागार के चिकित्सक ने उसे प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद रात करीब 10:20 बजे वार्डर के साथ उसे जिला अस्पताल भेजा गया। वहां रात 11:04 बजे चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जिला अस्पताल के मेमो में बंदी को मृत अवस्था में लाए जाने का उल्लेख होने और सीसीटीवी फुटेज में गतिविधियां दिखाई देने की बात सामने आने के बाद अस्पताल में उसकी स्थिति और उपचार को लेकर भी सवाल उठे। इस संबंध में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने इमरजेंसी चिकित्सक और संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किया था। अब अस्पताल पहुंचने के समय बंदी की स्थिति, उसे लाने वाले कर्मचारियों के बयान और उपचार से जुड़े अभिलेखों की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।

चिकित्सक और जेल प्रशासन के बीच तनातनी की भी चर्चा
बंदी की मौत के मामले में घटना के समय जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक की पूर्व तैनाती को लेकर भी चर्चा हो रही है। सूत्रों का दावा है कि चिकित्सक जब जिला कारागार अस्पताल में तैनात थे, तब खाद्य पदार्थों, दवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर उनका जेल प्रशासन से मतभेद चल रहा था। बताया जा रहा है कि जिला कारागार प्रशासन की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चिकित्सक को वहां से हटा दिया था।
सूत्रों के अनुसार, चिकित्सक ने भी जेल प्रशासन के खिलाफ उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा था। ऐसे में चिकित्सक और जेल प्रशासन के बीच पहले से चल रहे विवाद की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

-

तीन सदस्यीय टीम कर रही जांच, कर्मचारियों से पूछताछ

जिलाधिकारी की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच टीम में एडीएम सत्यप्रकाश, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह और एसीएमओ डॉ. रामरतन वर्मा शामिल हैं। टीम जिला कारागार में संबंधित बैरक, ड्यूटी व्यवस्था, मेडिकल रिकॉर्ड और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल कर चुकी है। जेल अधीक्षक कुलदीप सिंह और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। जांच टीम संबंधित चिकित्सकों के बयान और अभिलेखों का मिलान कर घटनाक्रम को स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है। बंदी की गिरफ्तारी, जेल में दाखिले, कारागार में उसकी तबीयत बिगड़ने और जिला अस्पताल पहुंचने तक की अवधि के बीच की परिस्थितियों को समझा जा रहा है।

अब जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें
टुनटुन की मौत के मामले में दस दिन बाद भी सिर में लगी चोट की परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हो सकी हैं। एक तरफ शुरुआती मेडिकल जांच में चोट के निशान नहीं मिलने की बात सामने आई, वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेड इंजरी दर्ज है। दूसरी तरफ, जिला अस्पताल में बंदी को मृत अवस्था में लाए जाने का उल्लेख और चिकित्सक-जेल प्रशासन के बीच पूर्व में विवाद भी चर्चा में है। ऐसे में जांच टीम के सामने मेडिकल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम का क्रमवार मिलान करना चुनौती है। अब जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि बंदी के सिर में चोट कब और किन परिस्थितियों में लगी तथा उसकी मौत से जुड़े सवालों का जवाब क्या है।



अभी कुछ लोगों का बयान नहीं दर्ज किया जा सका है। घटना क्रम से जुड़े कुछ अन्य बिंदुओं की भी पड़ताल की जा रही है। जल्द ही जांच पूरी करके रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंप दिया जाएगा।
विज्ञापन

-सुशील कुमार सिंह, एएसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें