घाघरा नदी के बिड़हर घाट के पास स्थित शिवमंदिर का होगा सुंदरीकरण
फाग कवि रंगपाल के नाम पर हरिहरपुर में बनेगा ऑडिटोरियम, पर्यटन के लिहाज से विकसित किए जाएंगे दोनों स्थल
पर्यटन विभाग की ओर से 6.42 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए घाघरा नदी के बिड़हर घाट के पास स्थित शिवमंदिर का सुंदरीकरण कराया जाएगा। इसके अलावा अन्य विकास कार्य भी कराए जाएंगे। इसी तरह नगर पंचायत हरिहरपुर में फाग कवि रंगपाल के नाम पर ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। दोनों जगहों को विकसित करने के लिए 6.42 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही इन पर कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
धनघटा से करीब सात किलोमीटर दक्षिण घाघरा नदी के उत्तरी तट पर बिड़हर घाट के बगल शिवमंदिर है। करीब तीस साल पहले इस स्थल पर वर्तमान महंत बाबा भुईलोटन दास ने चिमटा गाड़ा था। उस समय यहां साधारण घाट था और लोग नाव से आवागमन करते थे। सड़क मार्ग लगभग दो किलोमीटर दूर था। वर्ष 2015 में शिवमंदिर से सटे बिड़हर घाट पर पुल बनाया गया। इसके बाद संतकबीरनगर से अंबेडकरनगर, आजमगढ़ और जौनपुर जिलों के लिए आवागमन आसान हो गया। यहां से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को नेपाल सीमा से जोड़ने के लिए फोरलेन सड़क भी स्वीकृत है। शिवमंदिर से कुछ दूरी पर श्मशान घाट है। शिवमंदिर में अखंड रामायण पाठ, अनुष्ठान, शिव रुद्राभिषेक और सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने वालों की भीड़ लगती है। श्रावण और फाल्गुन मास में घाघरा नदी से जल भरकर भक्त बाबा तामेश्वरनाथ, बैजूनाथ, दानीनाथ, कंकड़ेश्वरनाथ, कुबरेनाथ, हैहेश्वरनाथ आदि शिवमंदिरों में चढ़ाते हैं। इस दौरान मेला भी लगता है। इस स्थल को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए राज्यमंत्री श्रीराम चौहान ने विशेष पहल की। माना जा रहा है कि पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। राज्यमंत्री की पहल पर पर्यटन विभाग की ओर से 445.78 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस जगह पर बाउंड्रीवाल का मरम्मत कार्य, घाट में रिटेनिंग वॉल का निर्माण, घाट में सीढ़ियों का निर्माण, मंदिर परिसर में इंटरलॉकिंग कार्य, मंदिर परिसर में हाईमास्ट लाइट, मंदिर परिसर में सोलर लाइट, मंदिर परिसर में आरसीसी बेंच बनाए जाने हैं।
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गृह नगर में उपेक्षित है कवि की सांस्कृतिक विरासत
नगर पंचायत हरिहरपुर में डेढ़ सदी पूर्व वर्ष 1864 में जन्मे कवि रंगपाल ने फाग विधा को अपनी रचनाओं के माध्यम से नई बुलंदियों पर पहुंचाया था। उनकी रचनाओं में दादरी, खेमटा, चौताल, झपताल के अलावा देशप्रेम और समसामयिक परिस्थितियों पर लिखे गीत शामिल हैं। भारतेंदु युग के इस कवि को भारतेंदु जी ने महाकवि की उपाधि से नवाजा था, लेकिन अपने ही गृह नगर में कवि की सांस्कृतिक विरासत उपेक्षित है। पाल सेवा संस्थान के अध्यक्ष बृृजेश पाल की ओर से फाग कवि रंगपाल के नाम पर ऑडिटोरियम सहित कई कार्य कराने की मांग सीएम योगी आदित्यनाथ से की गई थी। पहली बार जिले में सीएम आए थे तो कवि रंगपाल के नाम का जिक्र मंच से किए थे। सांसद जगदंबिका पाल ने विकास कार्य कराने की मांग सीएम से की थी। अब पर्यटन स्थल विकसित करने के नजरिये से इस जगह को विकसित किया जाएगा। पर्यटन विभाग की ओर से 197 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। हरिहरपुर नगर में प्रशासन ने रंगपाल के नाम पर ऑडिटारियम बनाने के लिए जगह चिह्नित की है। बाउंड्रीवाल होगा के साथ गेस्ट हाउस का निर्माण भी कराया जाएगा। सीसीरोड एवं इंटरलॉकिंग कार्य भी होंगे। हार्टीकल्चर और प्लांटेशन का भी कार्य होगा।
कोट
सीएम के विशेष सचिव के निर्देश पर धनघटा के बिड़हर घाट पर स्थित शिव मंदिर के सुंदरीकरण और अन्य कार्य कराने के लिए 445.78 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। साथ ही नगर पंचायत हरिहरपुर में फाग कवि रंगपाल के नाम पर ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, बाउंड्रीवाल आदि कार्य के लिए 197 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही दोनों प्रोजक्ट स्वीकृत हो जाएंगे।
- अरविंद राय, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
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पर्यटन के दृष्टिकोण से बिड़हर घाट स्थित शिव मंदिर में और फाग कवि रंगपाल की जन्मभूमि हररिपुर में विकास कार्य कराए जाएंगे। इसके लिए पर्यटन विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजा गया है। प्रशासन की ओर से भी दोनों प्रोजक्ट की स्वीकृति के लिए शासन में पैरवी की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही दोनों प्रस्ताव स्वीकृत हो जाएंगे।
- सुरेंद्रनाथ श्रीवास्तव, सीडीओ