कागजों में सिमट कर रह गए विद्यालय प्रबंध समिति
- दो वर्ष पहले चुने गए थे 1246 विद्यालयों में प्रबंध समिति के अध्यक्ष व पदाधिकारी
- सिर्फ रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने तक सीमित रह गया है कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। परिषदीय स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो वर्ष पहले चुने गए विद्यालय प्रबंध समिति के पदाधिकारियों का कार्य सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया है। किसी भी विद्यालय पर प्रबंध समिति सक्रिय नहीं है। समितियों को सक्रिय करने के लिए उन्हें फिर से प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू की गई है।
दो वर्ष पहले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिड डे-मील, ड्रेस, किताबों का वितरण, विद्यालय के मद में किए जाने वाले कार्य समेत अन्य सभी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विद्यालय प्रबंध समिति का गठन किया गया। जिसमें विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र के अभिभावक में से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व 15 सदस्यों का चुनाव हुआ। जिले में 1246 स्कूलों में विद्यालय प्रबंध समिति चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य चुने गए। इन सदस्यों को प्रशिक्षण देकर उनका दायित्व भी बताया गया लेकिन ये पदाधिकारी अपने दायित्वों को भूल गए। इनका कार्य सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक चेक व कार्रवाई रजिस्टर पर अध्यक्ष का हस्ताक्षर करा लेते हैं जबकि अन्य सदस्यों का हस्ताक्षर नहीं होता है। प्रभारी जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता रजनीश वैद्यनाथ के निरीक्षण में यह मामला प्रकाश में आया था।
उन्होंने बताया कि किसी भी विद्यालय में प्रबंध समिति के अध्यक्ष के अलावा अन्य किसी की उपस्थिति नहीं है। जिले स्तर से विद्यालय प्रबंध समिति का रजिस्टर भी दिया गया है। अनुश्रवण उसी पंजिका पर होना है लेकिन वह रजिस्टर दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंध समिति को फिर से सक्रिय किया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशालय से जन पहल माड्यूल व हस्त पुस्तिका प्राप्त हो चुकी है। जैम पोर्टल से मुद्रण कार्य कराया जा रहा है। इसके बाद प्रबंध समिति का एक दिवसीय प्रशिक्षण विद्यालय वार कराया जाएगा। इसके लिए एक हजार रुपये प्रति विद्यालय एमएमसी के खाते में उपलब्ध कराई जाएगी।