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राखी बांधकर बहनों ने लिया सुरक्षा का वचन

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रक्षाबंधन पर्व पर भाई की कलाई पर रखी बाधती।संवाद - फोटो : KHALILABAD
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राखी बांधकर बहनों ने लिया सुरक्षा का वचन
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ससुराल से मायके भी गईं बहनें, जेल में बंद भाइयों को भी बांधी राखी
जनपद में धूमधाम से मनाया गया पर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। रक्षा बंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ जनपद में मनाया गया। रविवार को पूरे दिन बहनों ने भाइयों के कलाई पर राखी बांधी और अपनी रक्षा का वचन लिया। जिनके अपने सगे भाई नहीं थे उन्होंने रिश्ते में लगने वाले भाइयों को राखी बांधी। भाइयों को राखी बांधने के लिए बहने ससुराल से मायके भी गईं। यहां तक कि जिन बहनों के भाई किन्हीं कारणों से जेल में बंद हैं वे बहनें भी राखी बांधने के लिए बस्ती कारागार गईं। टैक्सी स्टैंड, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर भी भीड़ भाड़ देखी गई। शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में रक्षा बंधन पर्व पर बाजारों में काफी रौनक रही।
रक्षाबंधन पर्व रविवार की सुबह 5:35 बजे से शुरू हुआ जो पूरे दिन चलता रहा। सुबह से ही बहनों का भाइयों को राखी बांधने का क्रम शुरू हो गया। राखी पर्व को लेकर छोटे बच्चे खूब खुश नजर आए। पुरोहितों ने भी यजमानों को रक्षा सूत्र बाधा। पर्व पर स्नान ध्यान के बाद नए वस्त्र धारण कर भाइयों ने सिर पर रुमाल रखकर बहनों से दही, अक्षत, जल, चंदन से तिलक लगवाए और बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधीं। इसके बाद भाइयों को मीठा खिलाया। मिठाई खाने और रक्षा सूत्र बंधवाने के बाद भाइयों ने बहनों को उपहार दिया। बहनों ने भाइयों की आरती उतारकर उन्हें धन-धान्य से परिपूर्ण एवं सुखी संपन्न जीवन का आशीष दिया। इसके अलावा दुल्हनें ससुराल से मायके जाकर भाइयों को राखी बांधी। बस्ती जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनें गईं। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, टैक्सी स्टैंडों पर भी काफी भीड़ देखी गई। जिन लोगों के पास अपना निजी साधन नहीं था उन्होेंने सवारी वाहनों से यात्रा की। जिनके पास अपना साधन था वे महिलाओं को लेकर ससुराल गए। कहीं बहनें भाइयों के घर पहुंची तो अन्यत्र भाइयों ने बहनों के घर जाकर श्रद्धा के इस पर्व को मनाया।
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धनघटा क्षेत्र में खूब रहा उत्साह
धनघटा। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर रक्षा बांधने का शुभारंभ रविवार की सुबह से शुरू हुआ। राखी बंधवाने को लेकर छोटे बच्चे खूब खुश दिखे। हालांकि युवा और बुजुर्गों में भी उत्साह कम न था। इस वर्ष मुहूर्त की बंदिश नहीं होने से सुबह से ही राखी बांधने का सिलसिला शुरू हो गया। छोटे बच्चे उत्साहित नजर आए। पुरोहितों ने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधा। रविवार की सुबह स्नान के बाद नए वस्त्र धारण कर भाई राखी बंधवाने के लिए तैयार हो गए। बहनों ने विधि-विधान से दही, अक्षत, चंदन का तिलक लगाया और भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मुंह मीठा कराया। भाई बहनों के घर जाकर राखी बंधवाकर बहन के दुख-सुख में साथ देने का भरोसा दिलाया। संवाद
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