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पशु पालन को बढावा देने की शुरू हुई पहल

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नस्ल सुधार के साथ उच्च गुणवत्ता के दूध का होगा उत्पादन
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राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत जिले के 100 गांव हुए चयनित
घर-घर जाएंगे पशुमित्र और गाय व भैंस का करेंगे निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान
पशुमित्रों को प्रत्येक कृत्रिम गर्भाधान पर मिलेगा 50 रुपये का पारिश्रमिक
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। सीएम के ड्रीम प्रोजक्ट राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत जिले के 100 गांवों का चयन हुआ है। चयनित गांवों में इसी माह से देसी नस्ल की गायों और भैंसों में नि:शुल्क कृत्रिम गर्भाधान कार्य शुरू होगा। इसमें ऐसी व्यवस्था है कि अच्छी नस्ल की बछिया और पड़िया ही पैदा होगी। ऐसा करके दूध की गुणवत्ता सुधारी जाएगी। इसके साथ पशु पालन को बढ़ावा दिया जाएगा।
जिला पशु अस्पताल के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉक्टर ओपी मिश्रा बताते हैं कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने अभी कुछ दिन पूर्व ही मथुरा के गोकुल से राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत संतकबीरनगर जिले में भी 100 गांवों चयन किया गया है। जिले में 50-60 पशुमित्र भी रखे गए हैं। पशुमित्रों के जरिए चयनित गांवों में गाय और भैंस का कृत्रिम गर्भाधान नि:शुल्क कराया जाएगा। प्रत्येक पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान में पशुमित्रों को 50 रुपये पारिश्रमिक दिया जाएगा। पशुमित्रों को सीमेन मुहैया कराया जाएगा। सीमेन की विशेषता होगी कि हरियाणा, थरपाकर, साहीवाल, मुर्रा आदि उच्च नस्ल की बछिया और पड़िया पैदा होगी। देसी गाय व भैंस में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए ऐसा करके गांवों के पशु पालकों को आर्थिक रूप से समृद्धशाली बनाने की शासन की मंशा है। दूध का वर्गीकरण किया गया है। उच्च गुणवत्ता का दूध पैदा करने की सोच है। उम्मीद है कि सितंबर में ही यह योजना जिले में शुरू हो जाएगी। इसके लिए जिले से पशु डॉक्टर नीरज मिश्रा और डॉक्टर शिवेंद्र मेरठ प्रशिक्षण लेने गए थे। वहां से दोनों डॉक्टर प्रशिक्षित होकर आए हैं। उसी के तहत जनपद में पांच दिवसीय प्रशिक्षण भी शुरू हुआ है। पहले दिन विकास भवन के सभागार में पशुधन विकास परिषद उत्तर प्रदेश की ओर से 20 पशुधन प्रसार अधिकारियों और पैरावेट को मास्टर ट्रेनरों के जरिए प्रशिक्षण दिया गया है। तीन दिन तक जिला पशु चिकित्सालय में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उसके बाद आखिरी दिन विकास भवन में प्रशिक्षण का समापन होगा। सीडीओ बब्बन उपाध्याय ने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान में ऐसी व्यवस्था है कि सिर्फ बछिया और पड़िया ही पैदा होगी। एक गाय और भैंस को सुबह-दोपहर और शाम तीन समय पर कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा। ताकि उसके गर्भधारण में कोई संशय नहीं होगा। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना से जिले में जहां पशु पालन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं, उच्च गुणवत्ता के दूध का उत्पादन भी होगा। इस योजना का लाभ जिले के पशुपालकों को उठाने के लिए संबंधित जिम्मेदारों को हिदायत दी गई है कि पूरी ईमानदारी से काम करें, ताकि शासन की मंशा साकार हो सके।
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चार निराश्रित पशु पालें तो कमाएं 3600 रुपये
जिले में 65 गो संरक्षण केंद्र हो रहे संचालित
1503 निराश्रित पशुओं को किया गया है संरक्षित
अमर उजाला ब्यूरों
संतकबीरनगर। निराश्रित पशुओं की समुचित देखभाल को लेकर शासन गंभीर है। बेरोजगार ग्रामीणों को लिए अच्छा मौका भी है, यदि गोवंश आश्रय में रखे गए चार पशुओं को अपने घर ले जाकर पालें तो उन्हें 3600 रुपये महीने पारिश्रमिक मिलेगा। इसके लिए शासन की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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सीडीओ बब्बन उपाध्याय ने बताया कि जनपद में 65 गो संरक्षण केंद्र संचालित हैं। जिसमें स्थायी तौर पर तीन कान्हा गोशाला, तीन कांजी हाउस और एक जिगिना में वृहद गोशाला संचालित है। इसके अलावा अन्य अस्थायी गोशालाएं बनाई गई हैं। इसमें कुल 1503 निराश्रित पशुओं को रखा गया है। शासन की ओर से निर्देश है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था निराश्रित पशुओं का पालन करना चाहे तो एक गो सेवा पर उसे 900 रुपये महीने पारिश्रमिक मिलेगा। एक व्यक्ति अधिकतम चार निराश्रित पशुओं की सेेेवा करने के लिए अधिकृत होगा और इस प्रकार वह महीने में 3600 रुपये पारिश्रमिक हासिल कर सकता है। इस काम में इच्छुक कोई भी व्यक्ति अपना आधार कार्ड और बैंक पासबुक उपलब्ध कराए तो उसे लिखित तौर पर संरक्षित किए जाने के लिए निराश्रित पशुओं को सौंपा जाएगा। शासन की ओर से अनुमन्य धनराशि उसे महीने के हिसाब से बैंक खाते में भेज दी जाएगी। सीडीओ ने निराश्रित पशुओं की देखभाल में लगाए जिम्मेदारों को हिदायत दी है कि उनकी सेवा समुचित तरीके से करें। पशुओं के खानपान और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। यदि किसी तरह की बीमारी की आशंका महसूस हो तो संबंधित पशु अस्पताल के डॉक्टरों को सूचित भी करें, ताकि बीमार होने वाले निराश्रित पशुओं का समुचित उपचार समय से हो सके।
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