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बजट की कमी से लटकीं परियोजनाएं

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बजट की कमी से लटकीं परियोजनाएं
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अक्तूबर 2021 में ही मेंहदावल और धनघटा में बन रहा अग्नि शमन केंद्र का निर्माण होना था पूरा
मगहर में पर्यटन विकास का कार्य भी बजट की कमी से पड़ा है अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। बजट की कमी से 50 लाख से ऊपर की 40 से अधिक परियोजनाएं अधर में लटकीं हैं। कई परियोजनाएं जो निर्धारित समय से पूर्ण नहीं हुईं हैं। उनकी लागत बढ़नी भी लाजिमी है। कई परियोजनाएं ऐसी भी हैं जिन पर सुस्त गति से काम हो रहा है। डीएम की ओर से अधूरी परियोजनाओं को पूरा किए जाने के लिए शासन से बजट की मांग की गई है।
वर्ष 2017 में करमा खान में राजकीय इंटर कॉलेज की स्वीकृति मिली थी। द्वितीय किस्त की धनराशि प्राप्त नहीं होने से कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसी तरह परसामाफी में सद्भाव मंडप का निर्माण, राजकीय आईटीआई सेमरियावां का निर्माण भी बजट के अभाव में पूरा नहीं हो पा रहा है। धर्मसिंहवा, सालेपुर, करमाखान, दानोकुइया, करही में पेयजल परियोजना भी बजट की कमी से लटकी है। वर्ष 2019 में राजकीय आईटीआई कांटामानसिंह, राजकीय इंटर कॉलेज परसामाफी, राजकीय इंटर कॉलेज मुसहरा का कार्य भी बजट की कमी से रुका पड़ा है। वर्ष 2019 से धनघटा और मेंहदावल में बन रहा अग्नि शमन केंद्र का निर्माण कार्य अक्तूबर 2021 में पूर्ण हो जाना था, लेकिन बजट के अभाव में कार्य अधूरा पड़ा है। चकदही में बन रहा राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान का निर्माण कार्य भी अधूरा है। मगहर में पर्यटन विकास के तहत कबीर अकादमी समेत कई कार्य बजट के अभाव में समय से पूर्ण नहीं हो पाए। जबकि विकास खंड बघौली में वर्ष 2020 में कामन सर्विस सेंटर, लोहरसन में राजकीय इंटर कॉलेज, गोपालपुर में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। चिलवनखोर में नर्सिंग कॉलेज बन रहा है। वित्तीय वर्ष 2020 में शुरू कराए गए कार्य की गति धीमी है। ग्रामीण अतुल पांडेय, अंकुर, सोनू गौड़, रामजीत प्रसाद, हरिश्चंद्र चौधरी बताते हैं कि जिले में गेहूं की कटाई के समय आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। जिला मुख्यालय पर फायर स्टेशन है, वहीं से गाड़ियां पहुंचतीं हैं। एक साथ कई जगह आग की घटनाएं घटित होने से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय से नहीं पहुंच पाती हैं। इससे काफी क्षति हो जाती है। धनघटा और मेंहदावल में बन रहे अग्निशमन केंद्र यदि समय से पूर्ण हो जाते तो लोगों को काफी राहत मिलती। नजदीक में फायर स्टेशन होने से सूचना पर गाड़ियां समय से पहुंच जाती। सीडीओ सुरेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने बताया कि 50 लाख के ऊपर की जो भी परियोजनाएं धन की कमी से रुकी पड़ी हैं। उसके लिए शासन से बजट की मांग की गई है। कार्य की गुणवत्ता जांचने और प्रगति बढ़ाने के लिए समय-समय पर जांच की जाती है।
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कोट
50 लाख से अधिक की परियोजनाओं की प्रगति के बारे में बैठकों में समीक्षा की जाती है। उनके जरिए निरीक्षण करके इन परियोजनाओं के कार्य की गुणवत्ता और प्रगति की जानकारी जुटाई जाती है। इसके अलावा जिम्मेदार अधिकारियों के स्तर से भी निगरानी की जाती है। जो परियोजनाएं बजट की कमी से रुकी हैं, उसके लिए बजट की मांग शासन से की गई है। बजट मिलते ही कार्य में तेजी लाने का प्रयास किया जाएगा। वैसे कार्यदायी संस्थाओं को गति बढ़ाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
- डीएम दिव्या मित्तल, डीएम
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