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जिला अस्पताल में हार्ट, न्यूरो, गुर्दा के नहीं है विशेषज्ञ चिकित्सक

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जिला अस्पताल में हार्ट, न्यूरो, गुर्दा के नहीं है विशेषज्ञ चिकित्सक
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33 पदों के सापेक्ष तैनात हैं मात्र 19 चिकित्सक, इलाज के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में भटकते हैं मरीज
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। कोरोना की चौथी लहर की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जिला अस्पताल में हार्ट, न्यूरो, गुर्दा के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। जिसकी वजह से इन बीमारी के मरीजों को अन्य जिलों में इलाज के लिए जाना पड़ता है। वैसे फिजिशियन चिकित्सक इन मरीजों को देखते हैं और बीमारी गंभीर होने पर गोरखपुर दिखाने की सलाह देते हैं। सीएमएस खुद अपने कक्ष में मरीजों को देखते हैं। इन बीमारियों के लगभग 150 मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंचते हैं।
संयुक्त जिला अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 33 पद स्वीकृत हैं। जिसमें 26 पदों पर चिकित्सक तैनात हैं। उसमें से चार चिकित्सकों ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया है। वहीं एक चिकित्सक निलंबित है। जबकि दो चिकित्सकों का स्थानांतरण हो चुका है। वर्तमान में कुल 19 चिकित्सक तैनात हैं। इसमें हार्ट, गुर्दा, मनोरोग के विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। इन बीमारियों के लगभग 150 मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंचते हैं। फिजिशियन चिकित्सक इन मरीजों को देखते हुए और बीमारी गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज या किसी विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाने की सलाह देते हैं। सीएमएस डॉ ओपी चतुर्वेदी खुद फिजिशियन हैं। वह अपने कक्ष में मरीजों को देखते हैं। जिससे मरीज भी संतुष्ट हो जाते हैं।
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अस्पताल में इलाज कराने आए चकदही निवासी उमाशंकर ने बताया कि उनके सीने में दर्द था, वह दिखाने आए थे। चिकित्सक ने दवा दी और गोरखपुर किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी है। नेदुला निवासी संजय कुमार ने बताया कि उनकी सांस काफी दिनों से फूल रही थी। जिसे दिखाया है तो चिकित्सक ने पांच दिन की दवा दी है। उसके बाद गोरखपुर दिखाने की सलाह दी है।
गोरखपुर जाने पर खर्च होते हैं अधिक पैसे
हार्ट व गुर्दे के मरीज को अगर गोरखपुर रेफर किया जाता है तो वह प्राइवेट चिकित्सक के पास जाते हैं, जहां फीस के तौर पर 500 रुपये लगते हैं। इसके साथ ही गोरखपुर जाने और आने का वाहन किराया 150 रुपये अलग से देना पड़ता है। पूरे दिन रहने पर खान पान में भी 200 से 400 रुपये खर्च हो जाता है। इसके साथ ही मरीजों को परेशानी अलग से उठानी पड़ती है।
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जिला अस्पताल में हार्ट, न्यूूरो और गुर्दा से संबंधित चिकित्सक नहीं है। इसके लिए मुख्यालय को पत्र भेजा गया है, जो मरीज आते हैं उन्हें देखा जाता है और गंभीर होने पर ही रेफर किया जाता है। मुख्यालय से चिकित्सकों की तैनाती होती है तो मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
डॉ ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस
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