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मानकों की अनदेेखी मासूमों पर पड़ रही भारी

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मानकों की अनदेेखी मासूमों पर पड़ रही भारी
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-गाजियाबाद की घटना से फिर उठे स्कूल बसों के फिटनेस पर सवाल
-दिसंबर माह में स्कूल बस से कुचल कर हो गई थी मासूम की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। गाजियाबाद में स्कूल बस में सवार दस साल के बच्चे की मौत ने एक बार फिर मगहर में हुई घटना की याद ताजा कर दी है। नौ दिसंबर 2021 को मगहर के एक निजी स्कूल की बस के नीचे आने से बयारा निवासी दस वर्षीय आयुष की मौत हो गई थी। इसके बाद वाहनों की जांच के लिए अभियान चलाया गया, लेकिन वर्तमान में एक बार फिर मानकों की अनदेखी हो रही है। यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
जिले में निजी स्कूलों में चलने वाले अधिकतर वाहन सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर सड़क पर चल रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही उजागर हो रही है। मगहर में बस से कुचलकर छात्र की मौत के बाद प्रशासन ने स्कूल बसों की फिटनेस की जांच शुरू कराई थी। इसके तहत 431 स्कूल बसों के संचालकों को फिटनेस जांच के लिए नोटिस भेजा गया था। इसके बाद फिर अभियान ठप पड़ गया। वर्तमान में प्राइवेट स्कूलों में बस, रिक्शा, टेंपो, जीप व अन्य प्रकार के वाहन चलते हैं। स्कूल वाहनों में नियमों की अनदेखी सामने आ रही है। मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए स्कूल संचालकों ने बसों में न तो खिड़कियों पर रॉड लगवाया है और न ही आवश्यक सूचनाएं लिखवाई है। इसके अलावा क्षमता से अधिक बच्चों को बसों और अन्य वाहनों में ढोया जा रहा है। मगहर में हुई घटना के बाद एआरटीओ ने जांच में पाया था कि बस की फिटनेस व इंश्योरेंस नहीं था। वर्तमान में मानकों की अनदेखी कर शहर के अलावा धनघटा, सेमरियावां, मेंहदावल, बखिरा, बाघनगर आदि स्थानों पर मानकों के विपरीत स्कूल वाहन चलाए जा रहे हैं।
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इंसेट-
दो बार भेजा गया स्कूल प्रबंधकों को नोटिस
स्कूल बसों के फिटनेस के लिए स्कूल प्रबंधकों को नोटिस दी जा चुकी है। एक बार फिर नोटिस भेजने की तैयारी है। इसके बाद जो भी बसें व अन्य स्कूल वाहन जांच में मानकों के विपरीत चलते पाए जाएंगे, उन्हें सीज किया जाएगा।
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आंजनेय सिंह- एआरटीओ
स्कूल बसों के लिए ये हैं निर्देश
- बस 15 वर्ष पुरानी न हो
- बस में बच्चों की सूची, जन्म, पता व ब्लड ग्रुप लिखा हो
- खिड़कियों पर रॉड होना चाहिए
-बस का रूट चार्ट लिखा जाए
-बस में एक पुरुष और महिला सहायक तैनात हो
-चालक व सहायक ड्रेस में हो
-बस का रंग गोल्डेन यलो विथ ब्राउन हो
- अग्निशमन यंत्र बाक्स हो
- बस पर ऑन ड्यूटी लिखा होना चाहिए
- बस के पीछे प्रबंधक व प्रधानाचार्य का नंबर होना चाहिए।
अभिभावक रखें इन बातों का ध्यान
स्कूल बस में अपने बच्चों को चढ़ाते वक्त अभिभावकों को भी कुछ अहम बातों का ध्यान रखना चाहिए। बस खड़ी होने पर ही बच्चों को चढ़ाएं। इसके अलावा बस ड्राइवर की हरकतों पर नजर रखें। सबसे अहम बात यह है कि इसका बात का ध्यान रखें कि कहीं ड्राइवर नशे में तो नहीं है। बस में हेल्पर के साथ स्कूल की ओर से एक जिम्मेदार शख्स की तैनाती करनी होती है, जिसकी बच्चों को बस में चढ़ाते और उतारते वक्त अहम जिम्मेदारी होती है। अगर यह जिम्मेदार बस में नहीं है तो पैरेंट्स को इसकी तत्काल शिकायत स्कूल प्रबंधन से करनी चाहिए। इसके अलावा पैरेंट्स को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि बस के अंदर बच्चों को बैठने की जगह मिलती हैं या नहीं। बस में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
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