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Sant Kabir Nagar News: यूरिया घोटाले की जांच में नपेंगी कई बड़ी हस्तियां

Sat, 30 Sep 2023 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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संतकबीरनगर। पीसीएफ के कोनी स्थित बफर गोदाम से अनुदानित 823.916 मीट्रिक टन यूरिया की कालाबाजारी का मामला उजागर होने से हड़कंप गया है। एआर कोऑपरेटिव की ओर से यूरिया का आवंटन हीं नहीं किए जाने की बात बताई जा रही है। ऐसे में गोदाम से कहां और किसको यूरिया बेची गई, यह अलग जांच का बिंदु है। यदि प्रकरण की विस्तृत जांच हुई तो कई कई बड़ी हस्तिया भी लपेटे मेंं आएंगी। इधर, कोतवाली पुलिस ने भंडार नायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
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डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने 23 सितंबर को टीम गठित कर पीसीएफ बफर गोदाम कोनी में भंडारित उर्वरक का भौतिक सत्यापन कराया। सत्यापन में आईएफएमएस के अनुसार, पीसीएफ बफर गोदाम में यूरिया 1911.915 मीट्रिक टन होनी चाहिए थी। जबकि, मौके पर 1087.984 मीट्रिक टन यूरिया ही पाई गई। स्टाॅक में 823.916 मीट्रिक टन यूरिया गायब मिली। इतना ही नहीं, जांच में बिना प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के उर्वरक की बिक्री होनी पाई गई। किसानों को उर्वरक खरीद की रसीद भी नहीं दी गई है। जिला कृषि अधिकारी ने इस मामले में दोषी पाए गए भंडार नायक राम सजीवन के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि सहकारिता विभाग की तरफ से समितियों को उर्वरक का आंवटन किया जाता है और गोदाम के भंडार नायक के जरिए उर्वरक समितियों को दी जाती है। इसमें चालान की तीन प्रतियां बनती हैं। एक प्रति समिति के सचिव को दी जाती है और रिकॉर्ड में पीसीएफ एक प्रति अपने पास रखता है। कितनी मात्रा में किस समिति को उर्वरक दी गई, उस सबका हिसाब रहता है। एआर कोऑपरेटिव कार्यालय से समितियों को खाद का आवंटन हीं नहीं किए जाने की बात बताई जा रही है, तो आखिर यूरिया किसको दी गई है? इधर, पीएओएस मशीन से भी उर्वरक की बिक्री नहीं की गई। ऐसे में कालाबाजारी की आशंका जताई जा रही है। यह जांच का विंदु अलग से है।
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जानकारों का कहना है कि यदि विवेचना ठीक ढंग से हुई तो इसमें कई अन्य लोग फंसेंगे। एआर कोऑपरेटिव कार्यालय से लेकर पीसीएफ जिला प्रबंधक के कार्यालय तक इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा होती रही। कोतवाल रविंद्र सिंह ने बताया कि भंडार नायक के खिलाफ केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस प्रकरण में की गहन विवेचना की जाएगी। इसमें जो भी दोषी होंगे,उन्हें केस में शामिल किया जाएगा।
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40 समितियों को उर्वरक दी गई है। सिर्फ इतनी चूक हुई है कि समय से ऑनलाइन संदेश नहीं भेजा। जिसकी वजह से डीएम की कमेटी को जांच में स्टॉक के सापेक्ष अंतर मिला है। उर्वरक बिक्री की रकम को विभागीय खाते में जमा करा दिया गया है। ठीक से जांच होगी तो सच्चाई खुद सामने आ जाएगी। -राम सजीवन, आरोपी भंडार नायक, पीसीएफ बफर गोदाम कोनी
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पीसीएफ गोदाम से उर्वरक को समितियों को दिया गया है। भंडार नायक की तरफ से गलती की गई कि समय से ऑनलाइन संदेश नहीं भेजा गया। उर्वरक बिक्री की रकम को खाते में जमा कराया गया है। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को भी दी गई है। -अंजना नायक, जिला प्रबंधक पीसीएफ
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पीसीएफ गोदाम बफर सेंटर है। कंपनी से उर्वरक यहां भंडारित होती है और सहकारी समितियों एवं अन्य सहकारी बिक्री केंद्रों पर उर्वरक प्रेषण की कार्रवाई की जाती है। उर्वरक का भौतिक प्रेषण के साथ ही ऑनलाइन प्रेषण किया जाना चाहिए, ताकि उर्वरक की बिक्री पीओएस मशीन से हो सके। किसानों को उर्वरक खरीद की रसीद प्राप्त हो। जांच में पाया गया कि स्टॉक मौके पर नहीं है। जबकि ऑनलाइन स्टॉक प्रदर्शित हो रहा है। इससे कालाबाजारी प्रतीत हो रही है। -पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी,जांच कर्ता अधिकारी
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मेरे स्तर से समितियों को यूरिया का आवंटन नहीं किया था। पीसीएफ के जिम्मेदार ही बता पाएंगे कि यूरिया कहां और किसको दी गई है? जांच होगी तो इस प्रकरण की सच्चाई पता चलेगी। -हरि प्रसाद, एआर कोऑपरेटिव
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पीसीएफ बफर गोदाम कोनी में उर्वरक के भौतिक सत्यापन का कार्य निर्धारित समिति के जरिए कराया गया। सत्यापन में यूरिया का भौतिक स्टॉक, आईएफएमएस में प्रदर्शित स्टॉक 1911 मीट्रिक टन के सापेक्ष करीब 1087 974 मीट्रिक टन पाया गया। इस प्रकार 823 मीट्रिक टन का अंतर पाया गया, जो अत्यंत गंभीर है। इस प्रकरण में दोषी भंडार नायक के खिलाफ केस दर्ज हो गया है। प्रबंध निदेशक पीसीएफ को पत्र भेजकर दोषी कर्मचारी और अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष विवेचना होगी। इसमें जो भी दोषी होंगे, बख्शे नहीं जाएंगे। -महेंद्र सिंह तंवर, डीएम
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