धनघटा/रोसया बाजार। वर्ष 2020 की 31 मई की काली रात धनघटा क्षेत्र के डिहवा गांव के लोगों के जेहन में आज भी ताजा है। तीन मासूम बेटियों को इलाज कराने के बहाने पिता अपने एक सहयोगी के साथ बाइक पर बैठाकर ले गया और घाघरा नदी के बिड़हर घाट पुल से नदी में फेंक दिया था। पुलिस के काफी प्रयास के बाद भी तीनों बच्चियों का शव नहीं मिला। इस मामले में आरोपी पिता और उसके सहयोगी पर पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी पिता और उसके सहयोगी को पकड़ कर सख्ती से पूछताछ की तो उसने बताया कि हां! मैंने ही तीनों बच्चियों को घाघरा नदी में फेंका था।
विवेचक सेवानिवृत्त सीओ अखिलानंद उपाध्याय ने बताया कि आरोपी के बताने के बाद तीन बच्चियों की तलाश धनघटा से लेकर बलिया तक घाघरा नदी में एनडीआरएफ, एसडीएआरएफ और स्थानीय गोताखोरों से कराई गई, लेकिन बच्चियों का पता नहीं चला। साक्ष्य जुटाने में कड़ी मशक्कत करनी पडी। इसमें पिता और उसके दोस्त को बच्चियों को साथ ले जाते जिन लोगों ने रास्ते में देखा था, उनका भी बयान दर्ज किया गया। आरोपी की पत्नी और उसके पड़ोसियों का बयान दर्ज किया गया। आरोपी ने खुद कबूल किया है कि उसने ही बच्चियों को नदी में फेंका है। विवेचना में मासूम बच्चियों को साथ लेकर घर से जाना और फिर उसे वापस नहीं लाने की वजह से आईपीसी की धारा 317 और 201 बढ़ाई गई। दोनों आरोपी जेल में बंद हैं। कोर्ट में उनकी गवाही हो चुकी है। केस बहस में चल रहा है। आरोपी पिता का बयान ही उसे जरूर सजा दिलाएगा।
इंसेट
यह है घटना क्रम
31 मई 2020 दिन रविवार की देर शाम डिहवा निवासी सरताज ने 112 नंबर पर अज्ञात लोगों के द्वारा चचेरे भाई 30 वर्षीय सरफराज पर हमला कर उसकी तीन बेटियों के अपहरण की सूचना दी। पुलिस की जांच-पड़ताल में पता चला कि पारिवारिक कलह से तंग आकर सरफराज ने अपने दोस्त बैड़ारी निवासी नीरज मौर्या के साथ साजिश रची और फिर दवा दिलाने के बहाने साढ़े छह वर्षीय सना, साढ़े चार वर्षीय सबा और ढाई वर्षीय समा को लेकर बाइक से निकला। रास्ते में नीरज को साथ ले लिया। बिड़हर घाट पुल पर पहुंच कर तीनों बेटियों को नदी में फेंक दिया। पीड़ित पत्नी समीरा खातून ने पति सरफराज और उसके सहयोगी नीरज मौर्या के विरुद्ध हत्या का केस दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपी पिता और उसके सहयोगी को पकड़कर कड़ाई से पूछताछ की तो उसने घटना की यही कहानी बताई। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम एक सप्ताह तक नदी में बच्चियों की तलाश कराती रही, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। आरोपी और उसका सहयोगी जेल में हैं। इधर, घटना के एक माह बाद समीरा खातून अपने मायके नियावा कोतवाली चली गई। उधर, बेटे सरफराज को जेल से छुड़ाने के लिए उसकी मां मरियम पत्नी सोहराब ने अपना मकान गांव निवासी एक व्यक्ति को बेच दिया। चार माह पहले ही मरियम की भी मौत हो गई। गांव के लोग इस घटना में आरोपियों को कड़ी सजा दिए जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
इंसेट
दोस्त के साथ मिलकर तीन मासूम बेटियों को घाघरा में फेंकने की घटना गंभीर है। दोनाें आरोपी जेल में बंद हैं। केस में साक्ष्य प्रस्तुत हो चुके हैं। गवाही भी हो चुकी है। केस बहस में चल रहा है। खुद आरोपी पिता ने बच्चियों को नदी में फेंकने का बयान दिया है, जो सजा के लिए पर्याप्त आधार है। उम्मीद है कि दो महीने के अंदर फैसला हो जाएगा। - विशाल श्रीवास्तव, जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी