संतकबीरनगर। प्रदेश में एंबुलेंस का औसत रिस्पॉन्स टाइम सात मिनट से भी कम है, जबकि जिले में यह करीब 10 मिनट है। हाईवे पर एंबुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम अगस्त में 7.19 मिनट था, जो सितंबर में घटकर 7.11 मिनट हो गया। विभाग का दावा है कि रिस्पॉन्स टाइम में आठ सेकंड की कमी आई है। एंबुलेंस के घटनास्थल तक पहुंचने का समय और कम हो जाए तो सड़क हादसों में घायल लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती है।
सड़क हादसों में घायलों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के साथ समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए जिले में 108 सेवा की 23 एंबुलेंस संचालित हैं। एंबुलेंस को हादसे की सूचना मिलते ही जल्द घटनास्थल तक पहुंचाने के लिए जिले में 14 हॉट स्पॉट बनाए गए हैं। इसके अलावा कुछ एंबुलेंस सरकारी अस्पतालों में भी तैनात रहती हैं।
हालांकि कई बार घटनास्थल की दूरी अधिक होने या रास्ते में जाम की समस्या के कारण एंबुलेंस को पहुंचने में समय लग जाता है। ऐसे में हादसे में घायल मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है। विभाग का कहना है कि रास्ता खाली होने पर एंबुलेंस करीब 10 मिनट में निर्धारित स्थान तक पहुंच जाती है।
गर्भवतियों के लिए 21 एंबुलेंस
गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए जिले में 102 सेवा की 21 एंबुलेंस संचालित हैं। विभाग के अनुसार, सूचना मिलने के बाद ये एंबुलेंस सामान्यत: 10 से 12 मिनट में गर्भवती महिला के घर पहुंचती हैं और उन्हें अस्पताल लेकर आती हैं। हालांकि रास्ते में जाम होने पर एंबुलेंस के पहुंचने में अधिक समय लग सकता है।
एंबुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम बेहतर करने के लिए चालकों को लगातार निर्देश दिए जाते हैं। समय-समय पर उनका प्रशिक्षण भी कराया जाता है। यदि रास्ते में जाम की समस्या न हो तो एंबुलेंस करीब 10 मिनट में निर्धारित स्थान पर पहुंच जाती है।
- डॉ. रामानुज कन्नौजिया, सीएमओ