संतकबीरनगर। गर्मी, उमस और बदलते मौसम का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण चर्म रोग, वायरल संक्रमण और बच्चों में मौसमी बीमारियों के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। सोमवार को जिला अस्पताल में कुल 840 मरीजों ने पंजीकरण कराकर उपचार कराया, जिनमें चर्म रोग, बाल रोग और वायरल संक्रमण से पीड़ितों की संख्या अधिक रही।
जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एसबी गौतम ने बताया कि इन दिनों फंगल इंफेक्शन, खुजली, एलर्जी, लाल चकत्ते, त्वचा में जलन और अन्य चर्म रोगों के मरीज ओपीडी पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक पसीना, दूषित जल, गंदगी, जलजमाव और स्वच्छता में कमी इन बीमारियों के प्रमुख कारण हैं।
घरों और नालियों के आसपास पानी जमा रहने से फंगस और अन्य सूक्ष्म जीव तेजी से पनपते हैं, जिससे त्वचा संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. गौतम ने लोगों को सलाह दी कि वे घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें, गीले कपड़े अधिक देर तक न पहनें, नियमित रूप से स्नान करें तथा पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें। उन्होंने कहा कि शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि पानी की कमी से भी त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि बच्चों में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, बुखार और त्वचा संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को धूप और गर्मी से बचाने, पर्याप्त पानी पिलाने तथा स्वच्छ खानपान पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. रमाशंकर सिंह ने बताया कि बढ़ते मरीजों को देखते हुए अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सभी चिकित्सकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को गुणवत्तापूर्ण उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया जा रहा है। साथ ही लोगों को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, स्वच्छता और समय पर उपचार ही इन मौसमी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। यदि लोग साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें तो चर्म रोगों और अन्य संक्रमणों से काफी हद तक बचा जा सकता है।