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खुद की मान्यता नहीं और 35 बीटीसी कॉलेजों को दे दी मान्यता

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खुद की मान्यता नहीं और 35 बीटीसी कॉलेजों को दे दी मान्यता
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- 17 साल बाद भी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान को नहीं मिली मान्यता
- भारी भरकम शिक्षकों और कर्मचारियों को हर माह दिया जाता है वेतन
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) को बने 17 साल हो गए। अभी तक इसे एनसीटीई से मान्यता नहीं मिल सकी है, जबकि यह 32 बीटीसी कॉलेजों को मान्यता दे चुका है। हालत यह है कि यहां पर प्रशिक्षण लेने वाले बीटीसी प्रशिक्षणार्थियों को बस्ती डायट से प्रमाण पत्र मिलता है। भारी भरकम शिक्षकों और कर्मचारियों के मद में हर माह 16 लाख रुपये वेतन के रूप में खर्च होता है। उसके बाद भी यह डायट बदहाल है।
शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए जिले में डायट की स्थापना वर्ष 2005 में हुई थी। जूनियर हाईस्कूल परिसर में इसका भवन बना और शिक्षकों व कर्मचारियों की तैनाती हुई। उसके बाद यहां पर काफी संख्या में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाने लगा और शिक्षक परिषदीय स्कूलों में तैनात भी हुए। डायट को अभी तक नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर (राजस्थान) से मान्यता मिलनी है, पर यहां तैनात जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक मान्यता के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। यहां तैनात कर्मचारी और शिक्षक कार्यालय आकर सिर्फ कोरम पूरा करते हैं। वर्तमान में यह परिसर पूरी तरह खाली रहा है। यहां पर न तो कोई प्रशिक्षण हो रहा है और न ही डायट के पास शिक्षकों की तैनाती का अधिकार ही रह गया है। हालांकि यह बीटीसी कॉलेजों को मान्यता देने में आगे है। अभी तक डायट जिले में 35 कॉलेजों को बीटीसी की मान्यता दे चुका है। संवाद
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15 प्रवक्ता समेत तैनात हैं 18 लोग
संतकबीरनगर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में एक वरिष्ठ प्रवक्ता, 14 प्रवक्ता, एक स्टेनो, दो लिपिक तैनात हैं। यहां तैनात प्राचार्य प्रताप सिंह बघेल के पास बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव का अतिरिक्त प्रभार है, वह यहां कभी कभार ही आते हैं। उनका पूरा कार्य प्रभारी प्राचार्य के रूप में प्रवक्ता ओंकारनाथ मिश्रा देखते हैं। उन्हीं के जिम्मे पूरे डायट की जिम्मेदारी है। यहां पर तैनात शिक्षकों व कर्मचारियों के मद में हर माह करीब 16 लाख रुपये वेतन और अन्य मद में खर्च होते हैं।
डायर परिसर में बना आवास बदहाल
डायट परिसर में कर्मचारियों के लिए आवास, प्राचार्य आवास के साथ ही प्रशिक्षण लेने वालों के लिए हास्टल का भी निर्माण हुआ है। रखरखाव के अभाव में यह भवन जर्जर हालत में है। परिसर में कोई प्रवक्ता नहीं रहते हैं, सिर्फ एक दो कर्मचारी ही परिसर के आवास में रहते हैं। परिसर में झाड़ झंखाड़ उग गया है। इसकी नियमित सफाई भी नहीं होती है।
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डायट को एनसीटीई से मान्यता के लिए पत्रावली भेजी गई है। मान्यता के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही एनसीटीई की टीम यहां आएगी और निरीक्षण कर मान्यता की कार्रवाई पूरी करेगी, जो भी लोग यहां तैनात हैं, वह प्रतिदिन कार्यालय आते हैं और आनलाइन प्रशिक्षण का कार्य भी पूरा करते हैं।
ओंकारनाथ मिश्र, प्रभारी प्राचार्य डायट
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