जिला अस्पताल में बच्चें के दांतों की जांच विशेषज्ञ डॉ. एके पाठक।
संतकबीरनगर। सावधान! जंक फूड से यारी बच्चों के दांतों की सेहत पर भारी पड़ रही है। बच्चों के समय से पहले ही दूध के दांत टूट रहे हैं।
नए दांत आने में भी समस्या आ रही है। जिला अस्पताल पर एक माह में 150 तक बच्चों के दांतों की समस्या लेकर आने का औसत रहा है। दांत शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। बच्चों में छह माह की उम्र के आसपास दांतों का निकलना शुरू होता है। ये दांत कच्चे होते हैं। इनको दूध के दांत भी कहा जाता है।
इनका छह से सात साल की उम्र में टूटना आरंभ होता है और इनके स्थान पर नए दांत आना शुरू होते हैं। यह सिलसिला 12 साल की उम्र तक चलता है। लेकिन बच्चों में जंक फूड के प्रति बढ़ता रुझान कम उम्र में ही दांतों के लिए खतरनाक होता जा रहा है। दांत के टूट का गिरने के बाद टेढ़े-मेढ़े दांत आने की समस्या भी सामने आ रही है। दंत चिकित्सक की मानें तो जंक फूड में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। इससे बैक्टीरिया कनेक्ट होते ही लैटिक एसिड बन जाता है।
इससे दांत सॉफ्ट हो जाते हैं। खराब होना शुरू हो जाते हैं और टूट कर गिरने लगते हैं। जंक फूड के सेवन से यह दांत सड़ कर पहले ही गिर रहे हैं। इससे पक्के दांत टेढ़े-मेढ़े आते हैं वहीं खाना भी दांतों में फंसता है। बच्चों के खानपान की आदतों में बदलाव जरूरी है।